बीकानेर में लगेगा ऊंटों का महाकुंभ! अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव में दिखेगा रेगिस्तान का असली रंग

Rajasthan News: बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव राजस्थान का अनोखा और रंगीन पर्व है, जहां ऊंटों की फर कटिंग, कैमल डांस, शाही जुलूस, ऊंटनी के दूध की मिठाइयां और रोचक प्रतियोगिताएं आकर्षण रहती हैं. 2026 में यह उत्सव 9 से 11 जनवरी तक आयोजित हो रहा है.

बीकानेर में लगेगा ऊंटों का महाकुंभ! अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव में दिखेगा रेगिस्तान का असली रंग
Image Credit: International Camel Fair 2026

Bikaner International Camel Fair: बीकानेर में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव राजस्थान के सबसे रंग-बिरंगे और खास आयोजनों में गिना जाता है. यह उत्सव सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंट के प्रति सम्मान और जुड़ाव को भी दर्शाता है. हर साल देश-विदेश से पर्यटक इस अनोखे उत्सव को देखने बीकानेर पहुंचते हैं.

बीकानेर ऊंट उत्सव से जुड़ी कुछ रोचक और हैरान कर देने वाली बातें इस प्रकार हैं -

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1. ऊंटों की अनोखी हेयर स्टाइल और टैटू (फर कटिंग)
इस उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण ऊंटों पर की जाने वाली फर कटिंग होती है. कुशल कलाकार ऊंटों के बालों को इस तरह काटते हैं कि उनके शरीर पर खूबसूरत डिजाइन और ज्यामितीय आकृतियां उभर आती हैं. दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो ऊंट किसी चलते-फिरते कैनवास पर बनी कलाकृति हों.

2. ऊंटों का नृत्य (कैमल डांस)
क्या आपने कभी ऊंट को संगीत की ताल पर नाचते देखा है? यहां ऊंटों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे राजस्थानी लोक संगीत की ढोलक और नगाड़ों की थाप पर अपने कदम मिलाते हैं और गर्दन को लय में हिलाते हैं. यह दृश्य दर्शकों के लिए बेहद रोमांचक होता है.

3. गंगा रिसला और शाही जुलूस
बीकानेर और ऊंटों का रिश्ता सदियों पुराना है. महाराजा राव बीका जी के समय से ही ऊंट बीकानेर की सेना का अहम हिस्सा रहे हैं. उस दौर की प्रसिद्ध ऊंट सेना को ‘गंगा रिसला’ कहा जाता था, जिसने विश्व युद्धों में भी अपनी भूमिका निभाई थी. आज भी उत्सव की शुरुआत जूनागढ़ किले से निकलने वाले भव्य जुलूस से होती है, जिसमें सजे-धजे ऊंट पूरे शान-ओ-शौकत के साथ चलते हैं.

4. ऊंटनी के दूध से बनी चाय और मिठाइयां
महोत्सव के दौरान पर्यटक ऊंटनी के दूध से बनी चाय और खास मिठाइयों का स्वाद भी चख सकते हैं. कुल्फी और मावे जैसी चीजें इस दूध से तैयार की जाती हैं. माना जाता है कि ऊंटनी का दूध औषधीय गुणों से भरपूर होता है और ऐसे व्यंजन दुनिया में बहुत कम जगहों पर मिलते हैं.

5. दिलचस्प और अनोखी प्रतियोगिताएं
इस उत्सव में केवल ऊंटों की दौड़ ही नहीं होती, बल्कि कई मनोरंजक प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं. मिस्टर बीकाणा और मिस मरवण प्रतियोगिता में साफा बांधने, मूंछों की बनावट और पारंपरिक पहनावे के आधार पर प्रतिभागियों का चयन किया जाता है. वहीं ऊंटों पर बैठकर रस्साकशी और महिलाओं की मटका दौड़ विदेशी पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच खास आकर्षण रहती है.

6. अग्नि नृत्य का रोमांच
शाम ढलते ही रेगिस्तान की रेत पर जसनाथी संप्रदाय के कलाकारों द्वारा अग्नि नृत्य प्रस्तुत किया जाता है. जलते हुए अंगारों पर नाचते कलाकारों को देखना दर्शकों के लिए हैरान कर देने वाला और रोमांच से भर देने वाला अनुभव होता है.

7. वर्ष 2026 का आयोजन
इस साल 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 9 जनवरी से 11 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है. यदि आप इन दिनों बीकानेर या आसपास के इलाकों में हैं, तो इन तीन दिनों में शहर की रौनक और उत्सव का माहौल देखने लायक रहेगा.

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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