जैसलमेर रवाना होने से पहले विधायकों के अजीबों-गरीब जवाब

सत्ताधारी खेमे ने अपने विधायकों को जैसलमेर के होटेल में शिफ्ट कर दिया है.

जैसलमेर रवाना होने से पहले विधायकों के अजीबों-गरीब जवाब
पूर्व मंत्री और नवलगढ़ के विधायक राजकुमार शर्मा ने अपने किट बैग से बल्ला और दूसरी खेल सामग्री निकाल कर दिखाई.

जयपुर: सत्ताधारी खेमे ने अपने विधायकों को जैसलमेर के होटेल में शिफ्ट कर दिया है. जैसलमेर रवाना होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने अपने पास पर्याप्त नम्बर होने और सरकार के सुरक्षित होने का दावा किया. इस दौरान ज्यादातर विधायक गम्भीरता से अपनी बात रखते दिखे, लेकिन कुछ विधायकों का अन्दाज़ रोचक था. 

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पूर्व मंत्री और नवलगढ़ के विधायक राजकुमार शर्मा ने अपने किट बैग से बल्ला और दूसरी खेल सामग्री निकाल कर दिखाई. तो दातारामगढ़ के विधायक विरेन्द्र सिंह का अन्दाज़ भी निराला था. विरेन्द्र सिंह ने कहा कि जैसलमेर भी राजस्थान में ही है और वहां जाने में किसी को कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए. विरेन्द्र सिंह ने कहा कि जैसलमेर में टिड्डी का प्रकोप भी है. तो हो सकता है कि विधायक वहां जाकर टिड्डी के प्रकोप से बचा लें. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब पीएम नरेन्द्र मोदी ताली और थाली बजाकर कोरोना को भगा सकते हैं तो विधायक ऐसा करके टिड्डियों को क्यों नहीं भगा सकते?

इसी तरह खाजूवाला के विधायक गोविन्दराम मेघवाल का अन्दाज़ भी कुछ अलग ही था. बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए मेघवाल ने कहा कि विधायकों को हॉर्स ट्रेडिंग से बचाने के लिए शिफ्ट किया जा रहा है. उन्होंने जैसलमेर में आगे की रणनीति बनाने की बात तो कही. साथ ही कोरोना के पुख्ता प्रबंधन में सरकार के काम की तारीफ़ भी की, लेकिन कोरोना का ज़िक्र आते ही बिना मास्क के एयरपोर्ट पहुंचे मेघवाल से जब उनके मास्क को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मास्क उनके पास ही है. पहले उन्होंने अपने गले में मास्क टटोलने की कोशिश की, लेकिन मास्क नहीं दिखा तो अपने बैग में ढूंढने की कोशिश की और जब इस पर भी मास्क नहीं मिला तो जेब से रुमाल निकाल कर सिर पर डाल लिया. सिर पर रूमाल डालकर मेघवाल इसे मास्क बताते हुए मुंह पर लपेटते हुए भी दिखे.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब विधायक सत्ताधारी खेमे के जैसलमेर दौरे पर टिड्डी भगाने का बयान दे रहे हैं. और मास्क को पूछने पर रुमाल सिर पर रखने जैसे काम कर रहे हैं तो क्या उन्हें अपने काम में पूरी तरह गम्भीर माना जाए?

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