स्वच्छता सर्वेक्षण पर BJP का कांग्रेस पर वार, कहा- मीटिंग करने से नहीं होती सफाई

पिछले साल नगर निगम और शहरवासियों के सामूहिक प्रयासों से स्वच्छता सर्वेक्षण में सुधार आया था और शहर ने 39वीं रैंक हासिल की थी

स्वच्छता सर्वेक्षण पर BJP का कांग्रेस पर वार, कहा- मीटिंग करने से नहीं होती सफाई
पूरे देश में स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की शुरुआत चार जनवरी से हो रही है

दीपक गोयल/जयपुर: नगर निगम की तैयारियों को देखते हुए इस बार जयपुर की स्वच्छता रैकिंग गिरना तय माना जा रहा है. कल से शुरू होने जा रहे स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर निगम में पिछली बार के मुकाबले कोई तैयारी नहीं की है. कार्यवाहक मेयर से लेकर जिम्मेदार अफसर फील्ड में रहने की बजाय फाइव स्टार होटलों में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैकिंग को सुधारने के लिए मंथन कर रहे हैं. जयपुर शहर की सफाई की बदहाली का हाल किसी से छुपा नहीं है. पर्यटन स्थल से लेकर अस्पतालों के बाहर और मुख्य सड़कें गंदगी से बेहाल हैं.

खबरों के मुताबिक स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में पिंकसिटी यानि जयपुर की साख दांव पर लगी हुई है. सरकार बदलने के साथ ही बेफ्रिक कार्यवाहक मेयर मनोज भारद्वाज और जिम्मेदार अफसरों ने शायद जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा लुटाने की ठान ली है. फील्ड में जाने की बजाय मेयर और अफसर जनता के पैसों से फाइव स्टार होटलों में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिग सुधारने पर मंथन कर रहे हैं.

गुरुवार को सी-स्कीम के एक होटल में कार्यवाहक मेयर मनोज भारद्वाज ने स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर पार्षदों और अधिकारियों की बैठक बुलाई और रैकिंग सुधारने के लिए सुझाव मांगे. इस पर भाजपा पार्षदों ने कहा की फाइव स्टार होटलों में बैठकें बुलाने से रैकिंग सुधरने वाली नही है. फील्ड में जाकर हालात देखों, सच्चाई का पता चल जाएगा. एक भी अधिकारी और कर्मचारी इस बार दिखाई नहीं दे रहा है. जबकि पिछली बार हर शाखा के कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक को स्वच्छता सर्वेक्षण के काम में लगा दिया था. लेकिन अब सरकार बदलते ही सबकुछ बदल गया है.

आयुक्त मोहनलाल यादव ने कहा की नर सेवा ही नारायण सेवा है. आयुक्त की सीट पर महाभारत का हर रोल निभाना पडता है. अधिकारियों पर प्रेशर और दबाव रहता है. इस पर भाजपा पार्षद मान पंडित ने कहा की नगर निगम में नर और नारायण तो ठेकेदार और अधिकारी हैं. जो एक दूसरे की सेवा करते हैं. यदि अधिकारियों को महाभारत का हर रोल निभाने की जरूरत पड़ती है तो राजनीति ज्वाइन कर लेनी चाहिए. 

वहीं भाजपा पार्षद अनिल शर्मा ने कहा की जनता के पैसे की क्यों इन फाइव स्टार होटलों में बैठकें बुलाकर बर्बाद किया जा रहा है. अशोक लाहोटी के विधायक बनने के बाद कार्यवाहक मेयर बने मनोज भारद्वाज भी स्वच्छता सर्वेक्षण में कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं. पिछली बार की तरह फील्ड में नगर निगम की टीम दिखाई तक नहीं दे रही है. डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वाली गाडियां घर नहीं पहुंच रही है. मुख्य सडकों पर लोग कचरा डालने को मजबूर हैं. मोबाइल एप के जरिए ही स्वच्छता सर्वेक्षण पर काम चल रहा है. जबकि यूडीएच मंत्री से लेकर डीएलबी सचिव तक स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारने के लिए अधिकारियों की बैठकों पर बैठकें ले रहे हैं.

स्वच्छता सर्वेक्षण सिर पर है और नगर निगम अधिकारी अब तक बैठकों से बाहर निकल नहीं पा रहे हैं. स्थिति यह है की सितंबर माह में 4 हजार 957 सफाईकर्मियों की भर्ती हुई थी. इनकी भर्ती के बाद नगर निगम के पास स्थाई सफाईकर्मियों की संख्या 8 हजार से अधिक हो गई है लेकिन निगम अधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की तीन माह बीत जाने के बाद भी सफाईकर्मियों को अब तक व्यवस्थित कर वार्ड में नियुक्त नहीं किया गया है.

सुबह और रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप्प हो गई है. पिछले साल नगर निगम और शहरवासियों के सामूहिक प्रयासों से स्वच्छता सर्वेक्षण में सुधार आया था और शहर ने 39वीं रैंक हासिल की थी. इसके लिए तत्कालीन मेयर अशोक लाहोटी, तत्कालीन आयुक्त रवि जैन, नगर निगम की टीम और व्यापारियों, आमजन का भी सहयोग मिला था. लेकिन इस बार अभी तक शहर में किसी भी तरह का माहौल नहीं बना है. 

पार्षदों का कहना है की अफसर भी इस बार गंभीर नहीं है. पिछले साल इन दिनों में रात को पांच से सात घंटे तक सफाईकर्मी शहर की सफाई व्यवस्था में जुटे रहे थे. लेकिन अब स्थिति यह है की फील्ड में जाकर काम कोई नहीं करना चाहता. उधर सरकार ने भी स्वच्छता सर्वेक्षण से ठीक एक दिन पहले नगर निगम का आयुक्त बदल दिया है. मोहनलाल यादव की जगह विजयपाल सिंह को नगर निगम का आयुक्त लगाया गया है. ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण के समय नए आयुक्त के सामने जयपुर शहर को लेकर चुनौतियां बड़ी है.

बता दें कि पूरे देश में स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की शुरुआत चार जनवरी से हो रही है. इस बार पुरानी रैंकिंग को और ऊपर ले जाना नगर निगम के लिए चुनौती होगी. मेयर से लेकर अफसरों की उदासीनता, आमजनता का सहयोग नहीं मिलना और एनवक्त पर नगर निगम के आयुक्त को बदलने से जयपुर शहर की स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिग घट सकती है.