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राजस्थान: सावरकर को 'पुर्तगाल का पुत्र' बताने पर गरमाई राजनीति, डोटासरा ने BJP को दी चुनौती

.शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि इतिहास के पन्नों के साथ बीजेपी ने छेड़छाड़ की थी. कांग्रेस सरकार तो सिर्फ उस छेड़छाड़ को सही कर रही है.

राजस्थान: सावरकर को 'पुर्तगाल का पुत्र' बताने पर गरमाई राजनीति, डोटासरा ने BJP को दी चुनौती
फाइल फोटो

जयपुर: पाठ्य पुस्तकों में बदलाव के साथ ही बड़े-बड़े विवाद खड़े हो गए हैं और इसकी शुरूआत हुई थी 10वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से. जिसमें सावरकर के नाम के आगे से वीर हटा दिया गया है. साथ ही पुस्तक में हुए बदलाव में उनके जीवन काल में स्वतंत्रता के लिए किए गए हर अध्याय को हटा दिया गया है. इसके साथ ही नई पुस्तक में लिखा गया की ब्रिटिश सरकार की जेल यातनाओं से प्रताड़ित होकर सावरकर ने चार बार ब्रिटिश सरकार से दया याचिका लगाई थी. जिसके बाद 1921 में सावरकर को 5 साल तक राजनीतिक सक्रियता से दूर रहने की शर्त पर रिहा किया गया और मार्केट में पुस्तक के आने के साथ ही विवाद खड़े हो गए.

पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार द्वेषतापूर्ण राजनीति का सहारा लेकर ऐसे महापुरुषों का अपमान कर रही है, जिनका देश की आजादी में बड़ा योगदान था. वहीं वीर सावरकर देश के क्रांतिकारी थे जिन्हें एक ही जीवन में दो बार आजीवन कारावास की सजा हुई लेकिन कांग्रेस ने ऐसे महापुरुष का अपमान किया है. इसके साथ ही देवनानी ने कांग्रेस पर अपने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से सीख लेने तक की भी सलाह दे डाली. वासुदेव देवनानी ने कहा कि इंदिरा गांधी ने सावरकर को साहस एवं देशभक्ति का प्रतीक बताया था. साथ ही कहा कि सावरकर एक देशभक्त क्रांतिकारी एवं असंख्य लोगों के प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं.

वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी ने भी कांग्रेस सरकार पर सावरकर मामले पर हमला बोला है. मदन लाल सैनी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने महापुरुषों के अपमान के अलावा काम ही क्या किया है. 5 महीने में ही अपने गलत फैसलों के चलते प्रदेश के लोगों को लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मजा चखा दिया है. इसके साथ ही मदन लाल सैनी ने कहा कि सावरकर का जो अपमान किया गया है उसके खिलाफ एक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा.

इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि इतिहास के पन्नों के साथ बीजेपी ने छेड़छाड़ की थी. कांग्रेस सरकार तो सिर्फ उस छेड़छाड़ को सही कर रही है. इसके साथ ही डोटासरा ने आरोप लगाया की पिछली सरकार में पाठ्यक्रम में छेड़छाड़ आरएसएस के इशारों पर की गई थी. चाहे महात्मा गांधी हों या फिर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, जवाहर लाल नेहरु, अटल बिहारी वाजपेय या फिर मनमोहन सिंह किसी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता लेकिन सावरकर ने ब्रिटिश सरकार की यातनाओं से परेशान होकर दया याचिका लगाई थी. साथ ही इतिहास के दस्तावेजों के आधार पर ही लिखा गया है कि 1911 में लगाई गई दया याचिका में सावरकर ने खुद को पुर्तगाल का पुत्र कहा था.

इसके साथ ही शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर पाठ्यक्रम पर बहस करनी है तो खुले मंच पर बहस करने के लिए तैयार हूं. हमारे पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं और अगर बीजेपी के पास हमारी बात को झूठा करने के लिए कोई दस्तावेज हो तो वो भी सबूत पेश करे. बहरहाल, चाहे पद्मिनी का जौहर हो या सावरकर का योगदान, या फिर महाराणा प्रताप की वीरता. हर मुद्दे पर कांग्रेस सरकार का नया पाठ्यक्रम सवालों के घेरे में घिरता जा रहा है. बीजेपी जहां अब एक ओर हस्ताक्षर अभियान चलाने की तैयारी में है तो वहीं कांग्रेस सरकार अपने बदलाव पर पूरी तरह से कायम नजर आ रही है.