हाई-ब्रिड विरोधी बीजेपी ने गैर-पार्षद को बनाया पालिकाध्यक्ष प्रत्याशी, कांग्रेस ने उठाए सवाल

स्थानीय निकाय चुनाव में कथित हाईब्रिड सिस्टम का विरोध करने वाली बीजेपी खुद ही इस सिस्टम को अपनाती दिख रही है. 49 निकायों में सबसे ज्यादा चर्चा माउंट आबू नगर पालिका की हो रही है. यहां तथाकथित 'हाईब्रिड सिस्टम' के तहत एक प्रत्याशी ने पालिका अध्यक्ष पर अपनी दावेदारी जताई है. 

हाई-ब्रिड विरोधी बीजेपी ने गैर-पार्षद को बनाया पालिकाध्यक्ष प्रत्याशी, कांग्रेस ने उठाए सवाल
बीजेपी ने ही गैर पार्षद रानी परमार को टिकट दे दिया.

जयपुर: क्या राजस्थान बीजेपी की कथनी और करनी में अंतर है? क्या पार्टी अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी मुद्दे का विरोध करती है? किसी प्रणाली के विरोध में होने के बावजूद भी क्या खुद की ज़रूरत पड़ने पर बीजेपी उस प्रणाली पर काम कर सकती है?

प्रदेश के राजनीतिक हलकों में कुछ इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं. दरअसल यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव में कथित हाईब्रिड सिस्टम का विरोध करने वाली बीजेपी खुद ही इस सिस्टम को अपनाती दिख रही है.
प्रदेश में इस बार 49 स्थानीय निकायों में चुनाव हुए. इन निकायों में अब मुखिया का चुनाव हो रहा है. वैसे तो यह सब सामान्य घटनाक्रम है लेकिन 49 निकायों में सबसे ज्यादा चर्चा माउंट आबू नगर पालिका की हो रही है. दरअसल इसकी चर्चा इसलिए क्योंकि यहां तथाकथित 'हाईब्रिड सिस्टम' के तहत एक प्रत्याशी ने पालिका अध्यक्ष पर अपनी दावेदारी जताई है. 

यहां बीजेपी ने रीना परमार को अपना प्रत्याशी बनाया है और उनका प्रत्याशी बनाये जाना ही कई सवाल खड़े कर रहा है. यह सवाल इसलिए भी क्योंकि रानी परमार खुद पार्षद भी नहीं हैं और सीधे पालिकाध्यक्ष के लिए उनका नामांकन दाखिल किया गया है. वैसे तो रानी ने पालिका में पार्षद का चुनाव भी लड़ा था लेकिन जनता से उन्हें नहीं जिताया. लिहाजा वे पार्षद भी नहीं बन सकीं. गैर पार्षद रानी पाटीदार को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी की इस सोच पर सवाल उठाए हैं.

यह सवाल इसलिए भी हैं क्योंकि 25 सदस्यों के बोर्ड में बीजेपी के सिर्फ छह सदस्य ही जीते हैं. पीसीसी महासचिव ज्योति खण्डेलवाल कहती हैं कि बीजेपी की कथनी और करनी में हमेशा अंतर रहा है. कांग्रेस कहती है कि सिद्धान्तों के नज़रिये से देखा जाए तो बीजेपी अपनी नीति पर चली है क्योंकि बीजेपी की नीति तो 'कहो कुछ और करो कुछ' की रही है. इसीलिए पहले तो हाईब्रिड का विरोध किया और अब बीजेपी ने ही गैर पार्षद रानी परमार को टिकट दे दिया. 

वहीं बीजेपी प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज कहते हैं कि माउंट आबू नगर पालिका अध्यक्ष का पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और इस कैटेगरी में उनका कोई पार्षद नहीं जीतने के चलते ही पार्टी ने हाईब्रिड सिस्टम के तहत गैर पार्षद को प्रत्याशी बनाया है. भारद्वाज कहते हैं कि यह मामला पार्टी के सिद्धान्तों से समझौते का नहीं बल्कि सरकार द्वारा तय की गई व्यवस्था के तहत काम करने का है.

हालांकि बीजेपी प्रवक्ता गैर पार्षद को भी पालिकाध्यक्ष का प्रत्याशी बनाए जाने के फ़ैसले की पैरवी नियमों को आधार बता कर रहे हैं लेकिन इस पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए. पीसीसी महासचिव कहती हैं कि कांग्रेस के पास भी सभी निकायों में खुद का पूरा बहुमत नहीं है और इसीलिए पार्टी ने सभी निकायों में खुद का प्रत्याशी नहीं उतारा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भी 46 निकायों में मुखिया के लिए खुद की पार्टी के प्रत्याशी उतारे जबकि तीन निकायों में निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दिया है.