BJP ने धनसिंह रावत के बयान से किया किनारा, कहा- मतदाता का कोई धर्म नहीं होता

मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा हमारी पार्टी ने धर्म के आधार पर वोट कभी नहीं मांगा है

BJP ने धनसिंह रावत के बयान से किया किनारा, कहा- मतदाता का कोई धर्म नहीं होता
प्रदेश में 7 दिसंबर के मतदान होने हैं

जयपुर: राजस्थान में विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचलें अपने चरम पर हैं. प्रदेश में हरेक पार्टी जनता के बीच जाकर उन्हें लुभाने में लगी है. कुछ नेता अपने पार्टी द्वारा किए गए कामों को लेकर वोट मांग रहे हैं तो कुछ नेता धर्म और संप्रदाय का कार्ड खेल रहे हैं. इसी कड़ी में उदयपुर रोड स्थित वाटिका में शनिवार को बीजेपी के बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के नवशक्ति सम्मेलन में शामिल हुए मंत्री धनसिंह रावत ने कहा कि मुस्लिम, कांग्रेस के साथ जुड़कर एक साथ मतदान कर सकते हैं तो सारे हिंदू मिलकर बीजेपी के साथ क्यों नहीं जा सकते हैं. उन्होंने धर्म को चुनावी एजेंडा बनाते हुए कहा कि केवल हिंदू ही बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिला सकते हैं. 
 
लेकिन बीजेपी ने बांसवाड़ा के पंचायती राज राज्यमंत्री विधायक धनसिंह रावत के विवादित बयान से पल्ला झाड़ लिया है. उनके इस बयान पर बीजेपी के वरिष्ट नेता और मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा 'एक मतदाता के पास कोई धर्म नहीं है, वह उस व्यक्ति के लिए वोट देता है जो देश के विकास के लिए काम करता है. हमारी पार्टी ने धर्म के आधार पर वोट कभी नहीं मांगा है'.

दरअसल, बैठक की शुरुआत में मंत्री धनसिंह ने कहा कि एक बार पृथ्वी गंज में 92 फीसदी वोटिंग कांग्रेस को मिली, 'कांग्रेस का मतलब मुसलमानों की पार्टी है हर मुसलमान ने कांग्रेस को वोट दिया है'. यदि कुछ पोलिंग में मुसलमान ने कांग्रेस को वोट दिया तो इस देश में राजस्थान में जितने भी हिंदू हैं उन्हें एकजुट होकर बीजेपी को वोट देना चाहिए. चाहे काम हुआ या नहीं हुआ कांग्रेस के साथ मुसलमान जुड़कर एक साथ मतदान कर सकते हैं तो सारे हिंदू मिलकर भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत से जीता सकते हैं. 

गौरतलब है कि प्रदेश में 7 दिसंबर के मतदान होने हैं और 11 दिसंबर को मतगणना के बाद जनता का फैसला राजजीतिक पार्टियों के सामने होगा. वहीं चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने भी तैयारियां पूरी कर ली है. प्रदेश में आचार संहिता लगने के बाद चुनाव आयोग सभी पार्टियों पर मुस्तैदी से नजर रख रही है. बता दें कि आयोग ने अभी तक कई नेतोओं और अधिकारियों के खिलाफ नोटिस तक दे दिया है. ऐसे में मंत्री रावत वोट मांगने के लिए उनका यह विवादित बयान उन्हें मुश्किल में डाल सकता हैं.