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राजस्थान: पानी की समस्या पर BJP ने शुरू की राजनीति, जयपुर में फोड़े खाली मटके

प्रदेश भाजपा अब विधानसभावार पेयजल संकट को लोकर प्रदर्शन की तैयारी में हैं. जयपुर में शहर भाजपा की ओर से जल भवन पर प्रदर्शन किया गया.

राजस्थान: पानी की समस्या पर BJP ने शुरू की राजनीति, जयपुर में फोड़े खाली मटके
प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दोनों अंचलों में पेयजल संकट गहराया हुआ है.

जयपुर: गर्मी से लोगों के हलक सूख रहे हैं, तापमान में बढ़ोतरी के साथ पेयजल की मांग में रिकॉर्ड इजाफा हो रहा है. शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण अचंलों में भी वॉटर सप्लाई को सिस्टम फेल होने के कगार पर है. पानी के वैकल्पिक इंतजाम भी अधूरे है. आमजन की परेशानी में पीएचईडी विभाग का प्रबंधन मदद नहीं कर पा रहा हैं. लोगों के गुस्से ने विपक्ष को राजनीति करने का अवसर दे दिया हैं. प्रदेश भाजपा अब विधानसभावार पेयजल संकट को लेकर प्रदर्शन की तैयारी में हैं. जयपुर में शहर भाजपा की ओर से जल भवन पर प्रदर्शन किया गया जिसमें भाजपा शहर अध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता, सांसद रामचरण बोहरा और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण चतुर्वेदी मौजूद रहे. 

9 जिलों में सूखा
प्रदेश में तपती धरती के साथ पेयजल संकट की समस्या उबाल मार रही है. शहरी और ग्रामीण दोनों अंचलों में पेयजल संकट गहराया हुआ है. मानसून की संभावना दर्शाने वाले आंकड़े भी चिंता में डाले हुए है. प्रदेश के नौ जिलों में सूखे की समस्या सामने है. बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, नागौर, चुरू, पाली और जालोर में पेयजल संकट अधिक है. जयपुर, टोंक, अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, बांदीकुई, मेड़तासिटी, डेगाना, बालोतरा, पाली, सिरोही, माउंट आबू सहित 38 शहर पेयजल की कमी का सामना कर रहे है. 18 हजार गांवों-ढाणियों में पेयजल आपूर्ति पर असर है. आम जनता की परेशानी सरकारी तंत्र को मुश्किल में डाल रही है. प्लानिंग नहीं होने से भाजपा को भी राजनीति का मौका मिला है. 

18 हजार गांव-ढाणियों में पानी का संकट
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के नौ जिले, 38 शहर और 18 हजार से अधिक गांव-ढाणियों में पानी का संकट अधिक है. पीएचईडी का भी दावा है कि पेयजल संकट से राहत देने के लिए बंद पड़े 1330 नलकूप और 3843 हैंडपंप चालू कराए गए है. 38 शहरों की प्यास बुझाने के लिए रोजाना 2873 टैंकर ट्रिप्स परिवहन किया जा रहा है. इसी तरह से 3161 गांव और ढाणी में पानी की आपूर्ति करने के लिए 3733 टैंकर ट्रिप रोजाना भेजे जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद 18 हजार गांव-ढाणियों में 24 से 72 घंटे के बीच ही पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। पानी की कालाबाजारी और टैंकर्स सप्लाई में गडबड़ी की शिकायतें भी प्रमुखता से सामने आई है. भाजपा का जयपुर में सड़क पर आंदोलन लोगों के गुस्से को प्रदर्शित करने का माध्ययम बना हुआ है. विभाग के अधिकारी जरुर अपनी व्यवस्थाएं दुरूस्त करने की बात कहकर ठंडे छीटे छिड़क रहे है. 

जल बचत ही विकल्प
राजस्थान गिरते भूजल की समस्या और पेयजल संकट का तेजी से सामना कर रहा है. मरू प्रदेश में आने वाले दिनों में संकट में इजाफे की संभावना है. ऐसे में ना केवल वॉर्टर सप्लाई मैनेजमेंट को बेहतर करने की जरुरत हैं साथ ही आगामी मानसून में जल संग्रहण के उपायों पर भी प्रमुखता से काम करने की दरकार है. इसकी पहल सरकारी स्तर के साथ आम लोगों को भी करनी होगी.