Corona के बाद खेल गतिविधियों पर आर्थिक संकट के काले बादल, नहीं मिल रहे Sponsors

करीब 9 महीने के बाद अब प्रदेश में खेल गतिविधियां (Sports Activities) दोबारा शुरू हो चुकी है.

Corona के बाद खेल गतिविधियों पर आर्थिक संकट के काले बादल, नहीं मिल रहे Sponsors
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: करीब 9 महीने के बाद अब प्रदेश में खेल गतिविधियां (Sports Activities) दोबारा शुरू हो चुकी है. राजधानी में भी विभिन्न खेलों में कई प्रतियोगिताओं का आयोजन शुरू किया जा रहा है. स्टेट और नेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं (State and National Level Competitions) के लिए पहले कंपनियों की स्पोंसरशिप (Sponsors) और भामाशाहों के सहयोग से आयोजन आसान होते थे, लेकिन वो अब ना के बराबर रह गई हैं. सरकार से मिलने वाली सहयोग राशि इन टूर्नामेंटों के लिए नाकाफी है.लि हाजा कई खेल संघ राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताएं कराने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं.

प्रदेश में मार्च महीने से कोरोना (Coronavirus) और लॉक डाउन के कारण खेल प्रतियोगिताएं (Sports Activities) ठप थी, लेकिन अब सरकार की अनलॉक पॉलिसी के विभिन्न चरणों में दी गई राहतों के बाद खेल गतिविधियां पटरी पर आई है, लेकिन खेल प्रतियोगिताओं के आयोजनों के लिए गाइड लाइन स्पष्ट नहीं होने से प्रतियोगिताओं के आयोजन नहीं हो सके थे. 

हालांकि अब स्पष्ट किया जा चुका है कि राज्य सरकार के मुताबिक सौ से कम की संख्या के इवेंट्स और खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा सकती है. इससे राजधानी के खेल मैदानों में भी छोटी बडी प्रतियोगिताएं दोबारा से शुरू हो सकी हैं.

खेल प्रतियोगिताओं के लिए दोबारा खेल संघों ने अपनी प्लानिंग भी शुरू कर दी है और राजधानी समेत राज्य के विभिन्न जिलों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं कराने का मानस भी तैयार किया, लेकिन कोविड महामारी के दौर में सबसे मुश्किल सामने आने लगी हैं स्पोंसरशिप की.को विड से पहले जहां खेल संघों को विभिन्न कंपनियों और भामाशाहों का सहयोग आसानी से मिल जाता था,तो  वहीं वह अब बेहद मुश्किल हो गया है. कोविड काल में कंपनियों ने घाटे के कारण बाकी खर्चो पर रोक लगा दी हैं, तो खेल संघों को भामशाह तलाशने से भी नहीं मिल पा रहे हैं. लिहाजा, दोबारा खेल संघ बड़ी प्रतियोगिताओं के आयोजन कराएं भी तो कैसे.

बहरहाल, कोविड के मुश्किल दौर में जहां दोबारा खेल गतिविधियों को शुरू तो कर दिया गया हैं, लेकिन प्रतियोगिताओं की मेजबानी कर पाना खेल संघों के चुनौतीभरा हो गया है. ऐसे में खेल संघों को उम्मीद है कि प्रतियोगिताओं के लिए सरकारी मदद बढाई जाए, तो इससे खेलों के आयोजनों में आसानी हो सकेगी.

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