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राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में उतरा दृष्टिबाधित छात्र, बताया राजनीति में आने का कारण

खेमराज मीणा का कहना है कि बचपन से ही कभी अपनी कमी को खुद पर हावी नहीं होने दिया. कॉलेज में प्रवेश लिया तो बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा. 

राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में उतरा दृष्टिबाधित छात्र, बताया राजनीति में आने का कारण
27 अगस्त को होने वाले छात्रसंघ चुनावों के लिए प्रचार-प्रसार जोरों पर है.

जयपुर: प्रदेश में इस समय छात्रसंघ चुनाव की चकाचौंध देखने को मिल रही है. छात्र प्रत्याशी जीत के लिए मतदाताओं की चापलूसी और बड़े-बड़े वादे करते हुए नजर आ रहे हैं. इन सबके बीच एक छात्र प्रत्याशी ऐसा भी दिखा जो बड़े-बड़े दावे तो नहीं कर रहा लेकिन समस्या समाधान का आश्वासन जरुर दे रहा है. इसी बीच खेमराज मीणा जो कि राजस्थान कॉलेज के अध्यक्ष पद पर छात्रसंघ चुनाव लड़ रहे हैं, जब इनके बारे में जाना तो सच्चाई चौकाने वाली थी. 

राजस्थान विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों 27 अगस्त को होने वाले छात्रसंघ चुनावों के लिए प्रचार-प्रसार जोरों पर है. ऐसे में गले में फूलों की माला और पीछे छात्रों की भीड़ से वो अलग ही पहचान में आ जाते हैं. लेकिन इन सबसे अलग राजस्थान कॉलेज का एक छात्र प्रत्याशी खेमराज मीणा ऐसा भी है जो सिर्फ एक साथी के साथ ही चुनाव प्रचार में लगा है. वो साथी भी इसलिए क्योंकि खेमराज मीणा को दिखाई नहीं देता है. ज़ी हां राजस्थान कॉलेज में पढ़ने वाले खेमराज मीणा जन्म से ही देख नहीं सकते हैं, लेकिन उसके हौसलों ने कभी उनकी इस शारीरिक कमजोरी को बधाक नहीं बनने दिया.

कभी किसी समस्या से हार नहीं मानने वाले खेमराज मीणा का कहना है कि बचपन से ही कभी अपनी कमी को खुद पर हावी नहीं होने दिया. कॉलेज में प्रवेश लिया तो बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी. हर साल छात्र प्रत्याशी वादे तो बहुत करते हैं लेकिन कभी काम नहीं होते. मुझे आंखों से दिखाई नहीं देता लेकिन फिर भी समस्या दिखती है. इन छात्र नेताओं को कभी समस्या नहीं दिखती. इसलिए मैने छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए चुनाव लड़ने का फैसला लिया है.

खेमराज मीणा का कहना है कि मैं दिमाग से नेत्रहीन नहीं हूं लेकिन ये छात्र नेता दिमाग से नेत्रहीन है. कॉलेज में क्लास नहीं चलती, कैंटिन की हालत ठीक नहीं है. दिव्यांगों के लिए आने वाला कोटा, खेल कूद गतिविधियों, लाइब्रेरी को लेकर छात्र नेताओं को दिखाई नहीं देती है. 

साथ ही खेमराज का कहना है कि आजादी के समय राजस्थान यूनिवर्सिटी तीसरे नम्बर पर आती थी लेकिन आज राविवि 300 नम्बर के पार पहुंच चुकी है. अपने इदारों को दम पर खेमराज मीणा ने छात्र राजनीति में उतरने की तो सोच ली, लेकिन चकाचौंद भरी इस अंधेरी छात्र राजनीति में खेमराज मीणा उजाला कर पाएंगे. ये बड़ा सवाल है.