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राजस्थान में भूजल विभाग की चेतावनी के बाद भी लगातार खोदे जा रहे ट्यूबवेल्स

भूजल विभाग की रिपोर्ट ये कहती है कि राजस्थान में जमीन से जितना पानी निकाला जा रहा है, उससे आधा पानी भी जमीन में नहीं आ रहा है.

राजस्थान में भूजल विभाग की चेतावनी के बाद भी लगातार खोदे जा रहे ट्यूबवेल्स
पीएचईडी विभाग ने एक साल में जयपुर में 732 नए ट्यूबवेल्स खोद दिए है.

जयपुर: एक तरफ भूजल विभाग लगातार ग्राउंड वाटर लेवल पर चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर पीएचईडी विभाग लगातार नए-नए ट्यूबवेल्स खोदकर पानी का जल स्तर कम कर रहा है. दोनों विभागों में तालमेल नहीं होने से राजस्थान में पानी का रिचार्ज हो ही नहीं पा रहा है.

अच्छी बारिश से जरूर आज हमें पानी जरूर मिल जाएगा,धरती को चीरकर ट्यूबवेल्स खोदकर भी पानी की व्यवस्था हो जाएगी. लेकिन हमारे कल के भविष्य का क्या होगा, इसका अंदाजा शायद पीएचईडी विभाग को नहीं है.क्योकि लगातार पेयजल के लिए पीएचईडी नए नए ट्यूबवेल्स खोद रहा है. जिससे ग्राउंड वाटर लेवल खत्म होता जा रहा है.

एक तरफ भूजल विभाग की रिपोर्ट ये कहती है कि राजस्थान में जमीन से जितना पानी निकाला जा रहा है, उससे आधा पानी भी जमीन में नहीं आ रहा है. लेकिन जलदाय विभाग लगातार ट्यूबवेल खोदकर पानी का रिचार्ज कम करता जा रहा है. पीएचईडी विभाग ने एक साल में जयपुर में 732 नए ट्यूबवेल्स खोद दिए है. जिसके बाद जल स्तर 200 फीट से नीचे चला गया. जयपुर में 15 में से 14 ब्लॉक डार्क जोन में शामिल. लेकिन फिर भी 680 से ज्यादा और ट्यूबवेल्स खोदे जाएंगे.

आमेर, बैराठा, बस्सी, चाकसू, दूदू, गोविंदगढ, जालसू, जमवारामगढ, झोटवाडा, कोटपुतली, पावटा, सांभर, सांगानेर, शाहपुरा डार्क जोन में शामिल हो चुके है. दूसरी तरफ भूजल विभाग की रिपोर्ट ये बताती है कि पानी का संचय करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि भूजल स्तर को बढाना बहुत जरूरी होगा. क्योंकि आने वाले दिनों में यदि पानी का रिचार्ज नहीं हुआ तो जलसंकट के लिए और भी हालात बिगड सकते है. 

वहीं भूजल विभाग के चीफ इंजीनियर सूरजभान सिंह का कहना है कि पानी के संचय तो किया जा रहा, लेकिन भूजल स्तर को बढाने के लिए कोई उपाय नहीं किए जा रहे है,जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है.