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राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में बीटीपी ने भी कई कॉलेजों में फहराया जीत का परचम

भारतीय ट्राइबल पार्टी विधानसभा चुनाव के बाद राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में भी बढ़त बनाते में सफल हुआ.

राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में बीटीपी ने भी कई कॉलेजों में फहराया जीत का परचम
छात्रसंघ चुनाव में भारतीय ट्राइबल पार्टी छात्रों के बीच अपनी पैठ बनानें में सफल रही.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: हाल ही में सम्पन्न हुए राजस्थान छात्रसंघ चुनाव ने उदयपुर संभाग की छात्र राजनीति का नया ट्रेंड सामने आया है. छात्रसंघ चुनाव का परिणाम कुछ हद तक संभाग के विधानसभा चुनाव की तरह ही रहा. जहां भारतीय जनता पार्टी की विचार धारा से जुडे संगठन एबीवीपी को कैंपस में बढ़त बनाने में सफलता मिली, वहीं सूबे में कांग्रेस पार्टी की सरकार में होने के बाद भी आदिवासी अंचल में एनएसयूआई अपेक्षा अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई.

छात्रसंघ चुनाव को राजनीति की पहली सीढ़ी कहा जाता है. यही कारण है कि आज का युवा किस विचार धार को पसंद रहा है. इसका पता भी छात्रसंघ चुनाव के परिणाम से चल जाता है. वहीं, बात अगर कभी सूबे की सत्ता तक पहुंचने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले आदिवासी मेवाड संभाग की करें तो इस बार के छात्रसंघ चुनाव ने मेवाड़ की राजनीति को नया ट्रेंड दिया है. संभाग के छात्रसंघ चुनाव परिणामों में विधानसभा चुनाव के परिणामों की जलक देखने को मिल रही है. 

एबीवीपी को संभाग के दोनों बडे विश्वविद्यालय, मोहनलाल सुखाडिया और महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय पर अपना कब्जा जमाने में सफलता मिली. साथ ही संभाग के 35 में से 12 में कॉलेजों पर संगठन का भगवा ध्वज लहराया है. सत्ता में होने के बावजूद एनएसयूआई उदयपुर शहर सहीत संभागभर में अपनी छाप छोड़ने में सफल नहीं हो पाई. जबकि एबीवीपी से पिछड़ते हुए एनएसयूआई महज 11 कॉलेजों में अपने अध्यक्षों को जीताने में सफल हो पाई.  

वहीं, बात अगर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी की करें तो विधानसभा चुनाव के बाद उनकी विचारधारा से जुड़े छात्र संगठन भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा भी इन चुनावों में बढ़त बनाते में सफल हुआ. बीपीवीएम ने डूंगरपुर में दोनों बड़े छात्र संगठनों का सुपड़ा साफ करते हुए जिले के सभी चारों कॉलेजों पर कब्जा जमाया. वहीं अन्य प्रत्याशियों ने 4 कॉलेजों में बाजी मारे में सफल रहे. 

बहरहाल, मेवाड संभाग में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव परिणामों के बाद अब छात्रसंघ चुनाव के परिणामों के बाद भारती जनता पार्टी के पदाधिकारियों के हौसले और बुलंद हुए है. कांग्रेस पार्टी के लिए यह चुनावी परिणाम फिर से चिंतन करने का अवसर है, क्योंकि करीब छ माह बाद संभाग में निकाय और पंचायत चुनाव होने है. ऐसे में चुनावी मैदान में कांग्रेस की राह अभी से मुश्किल होती दिख रही है.