बूंदी: प्रशासन की लापरवाही से बीमार हुआ जिला अस्पताल, मरीज बेहाल

आरएमएससीएल के डायरेक्टर ने जब अस्पताल का दौरा किया था, तब उन्हें भी यह समस्या बताई थी. उन्होंने नई मशीन भेजने की बात भी कही थी. इस बात को भी 8 माह बीत गए. 

बूंदी: प्रशासन की लापरवाही से बीमार हुआ जिला अस्पताल, मरीज बेहाल
अस्पताल के निशुल्क जांच केंद्र में भी खराब मशीनें रखी हुई है

बूंदी: राजस्थान के बूंदी जिला अस्पताल अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते खुद बीमार हो गया है. जिला अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए साल-2013 में 30 से 35 लाख रुपए खर्च कर खोले गए ऑपरेशन थिएटर में 127 हड्डी के ऑपरेशन हुए फिर, ताले लगा दिए गए. ओटी में 7 लाख की कीमत के तीन वेंटिलेटर, 10 लाख की सीआरएम मशीन, 13 लाख की एनस्थीसिया मशीन और 5 लाख रुपए की इंफेक्शन वेरिफिकेशन मशीन है. 

इसके अलावा और भी मशीनें हैं जो रखरखाव के अभाव में धूल फांक रही है. जब जिला अस्पताल के दोनों ओटी में महीने में 50 से 60 ऑपरेशन हो जाते थे. पर वहीं ओटी बंद होने से अब केवल 25 से 30 ऑपरेशन ही हो पा रहे हैं. करीब 5 साल पहले प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों को नई तकनीकी से सर्जरी के लिए एंडो लेप्रोस्कोपी सर्जरी मशीन मिली थीं. लेकिन दुर्भाग्य से पुराने ओटी में रखी मशीन की पैकिंग भी नहीं खोली गई है.और गेस्ट्रोस्कोपी मशीन भी धूल फांक रही है.

जबकि कर्मचारियों ने ऐसी कोई मशीन होने की जानकारी से ही इंकार कर दिया. इसके अलावा सालभर पहले करीब 40 लाख की लागत से बनी ब्लड सेपरेशन कंपोनेंट युनिट अभी शुरू ही नहीं हुई है. जिसके चलते हर महीने 150 से 200 मरीजों को कोटा जाना पड़ता है. जी मीडिया की टीम ने जब अस्पताल की बारीकि से पड़ताल की तो पाया गया कि आईसीयू वार्ड में तीन से चार साल पहले 4 वेंटिलेटर आए थे. जिनकी कीमत लगभग 10 लाख रुपए है. इनमें से दो वेंटिलेटर पैक पड़े हैं. एक वेंटिलेटर आईसीयू वार्ड में रखा है. लेकिन उसका उपयोग न के बराबर है. इसके अलावा अस्पताल के निशुल्क जांच केंद्र में भी खराब मशीनें रखी हुई है.

आरएमएससीएल के डायरेक्टर ने जब अस्पताल का दौरा किया था, तब उन्हें भी यह समस्या बताई थी. उन्होंने नई मशीन भेजने की बात भी कही थी. इस बात को भी 8 माह बीत गए. गौरतलब है कि, पिछली सरकार में तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने जिला अस्पताल का दौरा किया था. तब भी यह मशीनें व नया ऑपरेशन थिएटर बंद था और मशीनें धूल खा रही थी. उन्होंने सख्त निर्देश दिए थे कि मशीने काम में ली जाएं. लेकिन आज तक न तो मशीनें की पैकिंग हटी और ना ही आईसीयू को खोला गया है

एक तरफ जहां सरकार ने प्रदेश को निरोगी बनाने का बीड़ा उठाया है. वहीं, अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सरकार के प्रयासों पर पलीता लगाते हुए नजर आ रही है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि कब तक भ्रष्ट नौकरशाही के चक्कर में प्रदेश के मरीजों की जान जोखिम में डाली जाएगी.