टोंक जेल में चल रहा चौथवसूली का कारोबार, पैसे देकर क़ैदियों की मौज

जेल जी हां जेल का तसव्वुर सामने आते ही हर किसी के पसीने छूट जातें. जेल के कड़े कायदे ओर क़ानून बड़े से बड़े मुजरिमो को अपनी किए हुए गुनाह का बखूबी एहसास करातें है, 

टोंक जेल में चल रहा चौथवसूली का कारोबार, पैसे देकर क़ैदियों की मौज
टोंक जेल के इस पूरी करतूत का खुलासा किया है दिल्ली के वकील राजेन्द्र सिंह तोमर ने.

पुरुषोत्तम जोशी, टोंक: जेल जी हां जेल का तसव्वुर सामने आते ही हर किसी के पसीने छूट जातें. जेल के कड़े कायदे ओर क़ानून बड़े से बड़े मुजरिमो को अपनी किए हुए गुनाह का बखूबी एहसास करातें है, लेकिन प्रदेश का एक जेल ऐसा भी है जहां पैसे दो और मौज करो. यह हम नहीं बल्कि जेल में बंद खुद क़ैदियों के वकील ओर परिजन कह रहे हैं. 

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अपने टीवी स्क्रीन पर चल रही टोंक जेल की इन तस्वीरों को देख कर हर कोई सोचता है कि अंदर क़ैदियों के साथ जेल नियम और कायदे क़ानूनों के तहत बरताव किया जाता होगा, लेकिन इस कैद खाने की अंदर की तस्वीर ओर कहानी कुछ और ही है. टोंक के इस जेल में सज़ा याफ्ता ओर अंडर ट्रायल मुजरिमो के लिए पैसे देकर मौज की पूरी पूरी व्यवस्था खुद जेल प्रबंधन ने कर रखी है. यहां जेल में सज़ा काट रहे चम्बल हत्याकांड के मुख्य आरोपी मेघराज जाट, ओर उसके साथ ही अन्य संगीन अपराधों की सज़ा काट रहे मुजरिम राम पांडे ओर राजेश चायवाला ने जेल प्रबंधन पर अपनी धौंस जमा रखी है. आरोप है कि जेलर से सांठगांठ कर यह मुजरिम टोंक ज़िला काराग्रह में अन्य सज़ा याफ्ता क़ैदियों से चौथवसूली का गौरखधंधा चला रहे हैं. टोंक जेल के इस पूरी करतूत का खुलासा किया है दिल्ली के वकील राजेन्द्र सिंह तोमर ने. 

राजेन्द्र के आरोप है कि उनके एक परिचित क्लाइंट जितेंद सिंधी ओर शंकर जंगम धारा 307 के एक मामले में अंडर ट्रायल है. जो कुछ महीनों पहले ही सवाई माधोपुर जेल से ट्रांसफर होकर टोंक जेल आए हैं. इसी कुछ महीनों में टोंक जेल प्रबंधन ने उनसे जेल में चौथवसूली के नाम पर क़रीब 40 से 45 हज़ार रुपए भी ऐंठ लिए है. जेल प्रशासन यह पैसे पेटीएम ओर फ़ोन पे के ज़रिए मांगता है. जिसके सबूत के तौर पर वकील तोमर के पास स्क्रीन शॉट्स भी मौजूद है.

टोंक जेल पर चौथवसूली के यह आरोप कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी कई बार टोंक ज़िला कारागृह के प्रबंधन पर क़ैदियों को ऐशो आराम देने के बदले पैसे लेने के आरोप लग चुके है तो कई बार ज़िला कलेकरटर द्वारा किए गए औचक निरिक्षणो में जेल के अंदर मोबाइल फोन,सिमकार्ड, गुटखे ओर तम्बाकु जैसी नशीली सामग्रियों भी बरामद की जा चुकी है. फिलहाल टोंक जेल प्रबंधन के खिलाफ एडोवकेट राजेंद्र सिंह तोमर ने शिकायतों की झड़ी लगा दी है. उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर टोंक ज़िला कलेक्टर गौरव अग्रवाल को भी मामले की लिखित शिकायत सौंपी है. इसके साथ ही जिला कलेक्टर ने भी मामले में ततपरता दिखाते हुए अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी टोंक अजय कुमार आर्य के निर्देशन में टीम गठित कर मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है. साथ ही जल प्रबन्धन से भी मामले की तुरतं रिपोर्ट तलब के आदेश भी दे दिए हैं.

टोंक ज़िला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक ओर राज्य मानव अधिकार आयोग तक मामले की शिकयत पहुंचने की भनक लगने के बाद जिला काराग्रह टोंक प्रबंधन में पूरी तरह से हड़कम्प मच गया है. ऐसे में अब देखना यह होगा कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद किस तरह की कार्रवाई अमल में लाई जाती है. 

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