चुरू में असहाय गायों की सेवा में जुटा परिवार लोगों के लिए बना प्रेरणाश्रोत

चुरू के छापर गो सेवा समिति में मौजूद गायों में ज्यादातर ऐसी गाय मिलेंगे जो विकलांग हैं, बीमार है. ज्यादातर गाय यहां सड़क हादसे में घायल होकर पहुंची है.

चुरू में असहाय गायों की सेवा में जुटा परिवार लोगों के लिए बना प्रेरणाश्रोत
इस गौ सेवा समिति में 600 से ज्यादा गौवंश है

नरेन्द्र राठौड़/चूरू: देश में वैसे तो गौरक्षा की बातें तो बहुत होती है लेकिन चुरू के छापर कस्बे के एक परिवार ने गौरक्षा की निस्वार्थ सेवा कर पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन गए हैं. चुरू के इस परिवार की पीढ़ी बीमार, विकलांग और असहाय गायों की सेवा में जुटा है. यहां के गौशाला में करीब 600 से ज्यादा गौवंश है, जिनमें ज्यादातर अंधे, बीमार और विकलांग है. निस्वार्थ से गौसेवा में लगे इस परिवार के जज्बे की हर कोई सराहना कर रहा है.

चुरू के छापर गो सेवा समिति में मौजूद गायों में ज्यादातर ऐसी गाय मिलेंगे जो विकलांग हैं, बीमार है. ज्यादातर गाय यहां सड़क हादसे में घायल होकर पहुंची है. आज इस गौ सेवा समिति में 600 से ज्यादा गौवंश है, जिसकी देखभाल की जाती है. गौ सेवा का ये काम यहां सालों भर निरंतर जारी रहता है.

छापर के बाबूलाल रतवा जो पेश से ड्राइवर थे, ने इस गो सेवा समिति की स्थापना की थी. 2004 में सड़क हादसे में घायल एक गाय को लाकर उन्होंने देखभाल कर स्वस्थ कर दिया. 2012 में बाबूलाल रतवा के निधन के बाद भी उनके पुत्रों ने गो सेवा का सिलसिला जारी रखा है.

गौशाला में अलग-अलग इकाइयां बनाई गई है जिनमें आवारा पशु, विकलांग पशु, अंधे पशु और बीमार पशुओं के लिए अलग अलग जगह तय की गई है. पशुओं के लिए इस गौशाला में एक निजी चिकित्सक है. होली और दिवाली पर्व पर इस गौशाला में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं जिसमें कस्बे के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं. प्रत्येक अमावस्या को इस गौशाला से एक वाहन निकलता है जो कस्बे के घर घर से अनाज नगद राशि उठाता आता है जो गौ सेवा में खर्च की जाती है.

असहाय और बीमार गायों के सेवा के लिए जिस तरह एक परिवार समर्पित हैं. इलाके में लोग उनके इस कामों की काफी प्रशंसा करते हैं. निस्वार्थ भाव से की जा रही गौ सेवा को लोग सबसे बड़ा पुण्य मानते हैं. आज के इस दौर में लोग अपने पशुओं को सड़क पर भटकने के लिए छोड़ देते हैं, असहाय होने पर मुंह मोड़ लेते हैं. ऐसे लोगों के लिए चूरू के छापर कस्बे की यह गौशाला किसी प्रेरणाश्रोत से कम नहीं है.