कोटा में भी जानलेवा बन सकती है नहरें, मेज नदी हादसे के बाद भय का माहौल

कोटा की चंबल नदी से दाईं ओर बाईं मुख्य नहरें निकल रही है, जो सैकड़ों किलोमीटर तक किसानों को खेती के लिए पानी सप्लाई करती है. 

कोटा में भी जानलेवा बन सकती है नहरें, मेज नदी हादसे के बाद भय का माहौल
इनके किनारों से जब स्कूली बच्चों की गाड़ियां, मिनी बस निकलती हैं तो उन पर खतरा बना रहता है.

कोटा: लाखेरी में हुए मेज नदी हादसे के बाद कोटा के कई इलाकों में भी क्षेत्रवासियों में भय का माहौल बना हुआ है. खासकर उन इलाकों में जहां शहर के बीचों-बीच से होकर नहरें निकल रही हैं.

इन नहरों पर सुरक्षा दीवार नही होने से यहां हमेशा खतरा रहता है. इलाके के लोगों को डर है कि कहीं मेज नदी हादसा जैसी घटना यहां नहीं हो जाये. इसके लिए नहरों पर सुरक्षा दीवार जरूरी है.

दरसअल, कोटा की चंबल नदी से दाईं और बाईं मुख्य नहरें निकल रही है, जो सैकड़ों किलोमीटर तक किसानों को खेती के लिए पानी सप्लाई करती है. कई जगह पर ये नहरें इतनी गहरी और पानी से लबालब होती हैं कि किसी नदी से कम नहीं है. साथ ही पल में बड़ी से बड़ी गाड़ियों को अपने अंदर समा सकती है.

इन नहरों का अधिकांशतः भाग कोटा शहर के बीचों-बीच से होकर निकलता है, जिसके किनारों के पास बड़ी संख्या में रिहायशी इलाके हैं. इन नहरों के किनारों पर कोई सुरक्षा दीवार नहीं है और अगर कहीं छोटी दीवारें हैं तो वे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं.

किनारों से निकलती हैं स्कूली गाड़ियां
ऐसे में इनके किनारों से जब स्कूली बच्चों की गाड़ियां, मिनी बस निकलती हैं तो उन पर खतरा बना रहता है. इसके चलते क्षेत्रवासियों में भय का माहौल बना हुआ है. बोरखेड़ा, शिवपुरी धाम जैसे कई इलाकों में सैकड़ों परिवार ऐसी नहरों के आसपास रहते हैं, जिसके लिए अब क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि वे इन नहरों के किनारों पर ध्यान दे और जहां जहां रिहायशी आवासी बस्ती है वहां इनके किनारों पर सुरक्षा दीवार बनाये ताकि मेज नदी हादसा जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो और कोई मानवीय भूल से अकारण ही काल का ग्रास न बने.

स्कूली वैन पलट गई थी
हाल ही में कुन्हाड़ी में एक हादसा ऐसी ही नहर के किनारे पर हुआ था, जब बच्चों से भरी स्कूली वैन पत्थर आने से पलट गई थी और बच्चे नहर में गिरने से बाल-बाल बच गए थे. जरा सी भी अगर वैन साइड में होती तो पूरी वैन नहर में गिर सकती थी.