कैप्टन अंकित की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन, 6 दिन तक झील में फंसा हुआ था शव

भारतीय सेना (Indian Army) की 10 पैरा स्पेशल फोर्सेज के कमांडो कैप्टन अंकित गुप्ता (Captain Ankit Gupta) की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हो गई. 

कैप्टन अंकित की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन, 6 दिन तक झील में फंसा हुआ था शव
10 पैरा के मुख्यालय से सैन्य वाहन में उनकी पार्थिव देह को डिगाड़ी ले जाया गया.

अरुण हर्ष, जोधपुर: भारतीय सेना (Indian Army) की 10 पैरा स्पेशल फोर्सेज के कमांडो कैप्टन अंकित गुप्ता (Captain Ankit Gupta) की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हो गई. जोधपुर (Jodhpur News) के सैन्य क्षेत्र से सटे डिगाड़ी में बुधवार दोपहर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. गमगीन माहौल में कैप्टन अंकित के भाई ने मुखाग्नि दी. इस अवसर पर उनके करीब 15 परिजन मौजूद थे. उनकी पार्थिव देह श्मशान स्थल पहुंचने पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोगों ने भारत माता की जयकारे लगाते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी.  

शहर के तखतसागर (Takhatsagar ) में सात दिन पूर्व हेलिकॉप्टर से कूदने के बाद तखतसागर में डूबने से कैप्टन अंकित का निधन हो गया था. उनका शव छह दिन पश्चात मंगलवार को तखतसागर से बाहर निकाला जा सका. कैप्टन अंकित के परिजनों ने जोधपुर में ही अंतिम संस्कार की इच्छा व्यक्त की थी. आज सुबह उनके शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्ट मार्टम के पश्चात पार्थिव देह को 10 पैरा के मुख्यालय ले जाया गया। वहां उनके साथी जवानों व अधिकारियों ने उन्हें अंतिम सलामी देकर विदा किया. इस दौरान कैप्टन अंकित के परिजन लगातार साथ रहे.

10 पैरा के मुख्यालय से सैन्य वाहन में उनकी पार्थिव देह को डिगाड़ी ले जाया गया. श्मशान स्थल पर सेना के जवानों ने मोर्चा संभाला हुआ था. उन्होंने परिजनों के अलावा किसी अन्य असैन्य व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया ,यहां तक कि आसपास के मकानों पर भी जवान तैनात थे. वहीं, जोधपुर के डी गाड़ी स्थित जाट समाज के श्मशान घाट में वहां के स्थानीय कांग्रेसी नेता अशोक चौधरी वार्डन ने अंतिम रस्म पूरी करवाई. सेना के प्रति लोगों में कितनी दीवानगी है इसकी बानगी आज कैप्टन अंकित के अंतिम संस्कार में देखने को मिली. डिगाड़ी गांव में उनके अंतिम संस्कार से पूर्व बड़ी संख्या में क्षेत्र के युवा एकत्र हो गए. उन्होंने गगनभेदी नारों से जयकारे लगाए. साथ ही शव यात्रा के गांव में प्रवेश करते ही वे उसके साथ काफी दूर तक जयकारे लगाते हुए पैदल चले.

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