SC में उठा अवैध बजरी खनन का मामला, कोर्ट ने दिए यह आदेश

राजस्थान में अवैध बजरी खनन मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार को तुरंत प्रभाव से अवैध बजरी खनन रोकने का आदेश दिया.

SC में उठा अवैध बजरी खनन का मामला, कोर्ट ने दिए यह आदेश
फाइल फोटो

जयपुर: राजस्थान में अवैध बजरी खनन मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार को तुरंत प्रभाव से अवैध बजरी खनन रोकने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि राज्य सरकार कलेक्टर और एसपी को अवैध बजरी खनन रोकने के लिए पाबंद करें. सीजेआई ने राजस्थान में अवैध बजरी खनन रोकने के प्रयासों पर राज्य सरकार नाराजगी जाहिर करते हुए मामले की पूरी जांच के लिए 8 सदस्यीय सेंट्रल एम्पावर कमेटी (सीईसी) गठन का आदेश दिया.

याचिकाकर्ता ऑल राजस्थान ट्रक यूनियन के अध्यक्ष नवीन शर्मा की मांग पर सीजेआई ने सेंट्रल एंपावर्ड कमिटी गठन का आदेश दिया. साथ ही यह भी कहा कि इस कमेटी को नवीन शर्मा असिस्ट करेंगे. आठ सदस्यीय कमेटी 4 सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगी. रिपोर्ट के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा.

ज़ी मीडिया से बातचीत में नवीन शर्मा ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने करीब 15 मिनट तक हमारा पक्ष सुना. हमारी मांग के आधार पर ही सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी का गठन किया. शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार के तर्कों और उठाए गए कदमों से सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की. 

नवीन शर्मा का कहना है कि राजस्थान में कई नेता और अधिकारियों की मिलीभगत से लीगल माइनिंग शुरू नहीं हो पा रही है. इन तमाम के इंवॉल्वमेंट से ही राजस्थान में अवैध माइनिंग का कारोबार पनपा है. शर्मा ने कहा कि इसके चलते आम जनता को तीन गुना कीमत में बजरी खरीदनी पड़ रहा है. इन तर्कों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 4 सप्ताह में सीईसी को रिपोर्ट पेश करने को कहा है. 

सीईसी की रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा. शर्मा ने कहा कि सीईसी बताएगी कि अवैध बजरी खनन में कौन लोग शामिल हैं, जिनके कारण लीगल खनन शुरू नहीं हो पा रहा है और अवैध बजरी खनन व्यापक स्तर पर चल रहा है. शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार ने कोर्ट में शपथ पत्र पेश कर स्वीकार किया है कि अवैध बजरी खनन बड़े स्तर पर हो रहा है.