कोटा मेडिकल कॉलेज में खुलेगा सीबीआरएन सेंटर, डॉक्टरों को दिया विशेष प्रशिक्षण

भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रावतभाटा परमाणु बिजलीघर में सात दिन तक चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया.

कोटा मेडिकल कॉलेज में खुलेगा सीबीआरएन सेंटर, डॉक्टरों को दिया विशेष प्रशिक्षण
केन्द्र सरकार की दो सदस्य टीम पिछले साल 12 जून को जमीन का चयन कर चुकी है.

मुकेश सोनी/कोटा:​ रेडिएशन व न्यूक्लियर खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रावतभाटा परमाणु बिजलीघर में सात दिन तक चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया. इसमें मेडिकल कॉलेज कोटा, जयपुर, उदयपुर तथा रावतभाटा के नजदीक क्षेत्र जवाहरसागर, डाबी, रावतभाटा, जावरा से चिकित्सकों को शामिल किया. 

इन्होंने दिया प्रशिक्षण
रावतभाटा परमाणु बिजली घर में सात दिन तक रेडिएशन व न्यूक्लियर से खतरे से निपटने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सलाहकार डॉ. रवि जम्मिहाल, भामा परमाणु संयंत्र से डॉ. हेमन्त, एएफएमसी पूणे में कार्यरत एयर कंमाडर डॉ. रेणुका कुंते को  प्रशिक्षण दिया गया. साथ ही, सफदरगंज अस्पताल से कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी कटारिया, डॉ. विकास यादव, आरएपीपी से डॉ. गणेशन ने रेडियोलॉजी, रेडियोथैरपी, मेडिसिन से जुड़े चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया.

कोटा से यह चिकित्सक हुए शामिल
कोटा मेडिकल कॉलेज से मेडिसिन विभाग से आचार्य डॉ. मनोज सलूजा, डॉ.संगीता सक्सेना, डॉ. मुरलीराम तथा आसपास क्षेत्रों से डॉ. हर्षवर्धन,डॉ. परवेज, डॉ. देवेन्द्र झालानी, डॉ. सौरभ शर्मा, डॉ. एसएस सिंह, डॉ. नरेन्द्र राजावत प्रशिक्षण में शामिल रहे.

इन जगहों पर खुलेंगे सेंटर
देश में 32 स्थानों पर द्वितीय स्तर की सीबीआरएन (कैमिकल, बायोलॉजिकल, रेडिएशन, न्यूक्लियर) आइसोलेट सेंटर खुलेंगे. इसमें कोटा मेडिकल कॉलेज भी शामिल है. केन्द्र सरकार की दो सदस्य टीम पिछले साल 12 जून को जमीन का चयन कर चुकी है. तृतीय स्तर की सुविधा देश के चार महानगरों दिल्ली, मुम्बई, कलकता व मद्रास में प्रस्तावित है.

क्यों है जरूरत
परमाणु बल व चेरनोबिल दुर्घटना की घातकता से हम सब परिचित है,लेकिन विश्व में भविष्य में इनकी अपेक्षा नागरिक जीवन में रेडिएशन आधारित विस्फोट के प्रयोग की संभावना अधिक है. जैसे कि आंतकी संगठनों द्वारा भय पैदा करने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है. इसी प्रकार अज्ञानतावश मायापुरी दुर्घटना की पुर्नरावत्ति भी संभव है. इन सब खतरों को देखते हुए यह आवश्यक हो जाता है कि हम सभी विशेषकर चिकित्सक व आपदा राहत दल के लोग इस प्रकार के खतरों से निपटने में समक्ष हो. चूंकि रेडिएशन दुर्घटना वर्तमान व भविष्य का एक अहम खतरा है. इनसे निपटने में सक्षम व दक्ष होना जरुरी है. 

इसके अलावा रेडिएशन दुर्घटना होने पर रेस्क्यू व मेडिकल टीम की क्या जिम्मेदारी होती है. इसका भी प्रशिक्षण दिया गया. सोर्स को ढूंढने में काम आने वाले उपकरणों के प्रयोग की जानकारी व अभ्यास करवाया गया. (एआरएस) एक्यूड रेडिएशन सिंड्रोम बीमारी रेडिएशन के सम्पर्क में आने वाले व्यक्ति में सभी अंग तंत्रों पर दुष्प्रभाव दिखाती है.