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लोकसभा चुनाव से पहले GST में राहत देने जा रही है केंद्र सरकार

जीएसटी में राहत देते हुए केंद्र सरकार ने दिसंबर में लचीला रुख अपनाते हुए 99 फीसदी उत्पादों पर जीएसटी को सीमित दर पर लागू किया है.

लोकसभा चुनाव से पहले GST में राहत देने जा रही है केंद्र सरकार
जीएसटी पर सख्त रही सरकार ने जीएसटी काउंसिल की बैठक के दौरान कर की दरों में कटौती की है. (फाइल फोटो)

अंकित तिवारी, जयपुर: लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार GST में लगातार बदलाव कर रही है. कड़ाई से लागू किए गए इस कानून में अब चुनावी सीजन में राहत का दौर जारी है. बदलाव के बाद वस्तु और सेवा कर (Goods and Service Tax) पर वार्षिक रिटर्न भरने की अंतिम तारीख भी 30 जून 2019 तक बढ़ा दी गई है. 

आपको बता दें कि, जीएसटी में राहत दे रही केंद्र सरकार ने दिसंबर में लचीला रुख अपनाते हुए 99 फीसदी उत्पादों पर जीएसटी को सीमित दर पर लागू किया है. इसके अलावा वार्षिक रिटर्न को 30 जून 2019 तक जमा करवा कर एमनेस्टी स्कीम का लाभ लेने की बात कही थी, ताकि इसका लाभ कारोबारियों को आम चुनावों से पहले मिल सके. 

विभाग के द्वारा जीएसटी काउंसिल की आखिरी बैठक में निर्णय लेकर कई वस्तुओं पर लागू 28 फीसदी की टैक्स दर को कम किया गया है. जिसके बाद जीएसटी की 28 फीसदी की उच्चतम टैक्स स्लैब में सिर्फ दो दर्जन वस्तुएं ही रह गई हैं. लेकिन, एमनेस्टी स्कीम के देर से लागू होने के कारण व्यापारिक जगत में इसका विरोध भी हो रहा है. वैसे पेट्रोलियम उत्पाद, बिजली, शराब, जमीन और निर्माण अनुबंध इसमें शामिल हैं, जबकि रीयल एस्टेट जैसे क्षेत्र जीएसटी के दायरे से अब तक बाहर हैं.

वहीं, अभी भी कई उत्पादों पर रिटर्न दाखिल करने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्टील उत्पाद पर जीएसटी को लेकर दो तरह की स्लैब होने के कारण इंडस्ट्री को रिफंड लेने में असुविधा हो रही है. इस समय स्टील फिनिश्ड पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत है और रॉ मैटेरियल पर 18 प्रतिशत की दर है. ऐसे में प्रोडक्ट कॉस्टिंग और जीएसटी रिफंड को लेकर कंपनियों को लेकर तकनीकी परेशानियां भी आ रही हैं. जिस कारण कई कंपनियों को जीएसटी रिफंड अब तक वापस नहीं मिल पाया है. वैसे इंडस्ट्री के लोगों की मांग है कि इसे संशोधित कर सारे स्टील उत्पादों पर 12 प्रतिशत कर लगाया जाना चाहिए. 

आर्थिक जगत के सुझावों पर सरकार कर रही है अमल 
माना जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल आम चुनाव से पहले उन सभी मुश्किलों को दूर करने जा रही हैं जिनका विरोध भाजपा सरकार को आर्थिक जगत की बैठकों में झेलना पड़ रहा हैं. बताया जा रहा है कि वित्त मंत्रालय इन बैठकों में मिल रहे सुझावों को तुरंत जीएसटी काउंसिल में भेज रहा है. इसके अलावा रिफंड प्रक्रिया की जटिलताए दूर करने के प्रयास भी काउंसिल कर रहा है. 

जीसएटी को लागू करने के लिए सख्त है सरकार 
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जीएसटी की मासिक वसूली अप्रैल-नवंबर 2018 के दौरान औसतन 97,100 करोड़ रुपये रही. पिछले वित्त वर्ष में मासिक वसूली का औसत 89,100 करोड़ रुपये था. इस वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर के दौरान सरकार ने जीएसटी की चोरी के 12,000 करोड़ रुपये के मामले पकड़े और 8000 करोड़ रुपये की वसूली की गई है. साथ हीं जीएसटी लागू होने के बाद करदाता इकाइयों का भी विस्तार हुआ है.