जयपुर: अन्नपूर्णा भंडारों के बंद होने के बाद भी मिलेगा सस्ता राशन, खाद्य विभाग ने उठाया ये कदम

राज्य सरकार राशन की दुकानों पर सस्ती दर पर नॉन पीडीएस आइटम बेचने के लिए छत्तीसगढ़ पैटर्न लागू कर सकती है. 

जयपुर: अन्नपूर्णा भंडारों के बंद होने के बाद भी मिलेगा सस्ता राशन, खाद्य विभाग ने उठाया ये कदम
राशन की दुकानों पर सिर्फ पीडीएस आइटम ही उपभोक्ताओं को मिल रहे हैं.

जयपुर: अब खाद्य विभाग राशन की दुकानों पर नॉन पीडीएस आइटम (Non PDS Items) बेचने के लिए छत्तीसगढ़ मॉडल लागू कर सकता है. इसके लिए राजस्थान से पांच अधिकारियों का दल छत्तीसगढ़ भेजा गया है, जहां राशन की दुकानों पर नॉन पीडीएस आइटम प्रणाली का अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी. साथ ही विभाग का एक दल यूपी में सप्लाई चेन सिस्टम को देखने जाएगा.

प्रदेश में सत्ता बदलने के साथ ही तत्कालीन वसुंधरा सरकार के समय राशन की दुकानों पर शुरू हुए अन्नपूर्णा भंडारों पर भी बंद हो गए हैं, जिसके कारण अब राशन की दुकानों पर सिर्फ पीडीएस आइटम ही उपभोक्ताओं को मिल रहे हैं लेकिन अब राज्य सरकार राशन की दुकानों पर सस्ती दर पर नॉन पीडीएस आइटम बेचने के लिए छत्तीसगढ़ पैटर्न लागू कर सकती है. 

उपभोक्ताओं से लिया जाएगा फीडबैक
इसके लिए पांच अधिकारियों का दल छत्तीसगढ़ अध्य्यन करने के लिए भेजा गया है. ये दल छत्तीसगढ़ में राशन की दुकानों पर बिकने वाला नॉन पीडीएस आइटम का अध्य्यन करेगा और देखेगा की उपभोक्ता एक छत के नीचे मिलने वाली सामग्री से कितना संतुष्ट है, दल उपभोक्ताओं से फीडबैक भी लेगा कि वो महीने में अपना राशन का सामान लेने आते हैं तो क्या उस समय अपनी रोजमर्रा की भी सामग्री भी राशन की दुकान से लेते हैं. उधर एक दल यूपी में राशन सप्लाई चेन सिस्टम को देखेगा, जिसमें गोदाम से जाने वाला गेंहू का राशन की दुकानों तक पहुंचने ही उपभोक्ता को भी पता चल सकेगा.

क्या कहना है खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव का
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि अन्नपूर्णा भंडार से पहले राशन कार्डधारकों को राशन दुकान से रियायती दर पर मुहैया करवाए जाने वाले राज ब्रांड के नॉन पीडीएस आइटम (चाय, नमक, साबुन, तेल, दाल आदि) उपलब्ध कराया जाता था. लेकिन एफएसएसए के कारण वैधानिक प्रकिया के तहत नॉन पीडीएस आइटम की सप्लाई बंद की गई थी.

शुद्ध सामग्री मुहैया करवाना है उद्देश्य
राज्य सरकार की ओर से उपभोक्ताओं को राशन के अलावा आम उपभोग से जुड़ी अन्य खाद्य सामग्री मुहैया करवाने के लिए राशन दुकानों से नॉन पीडीएस आइटम की बिक्री शुरू की गई थी. इसमें सोयाबीन तेल, चना दाल, नमक, चाय, मसाले आदि मुहैया करवाए गए. प्रदेश के 25 हजार 706 राशन डीलरों के जरिए साल 2014 तक एक करोड़ 77 लाख 19 हजार उपभोक्ता इसका फायदा उठा पा रहे थे क्योंकि राज ब्रांड की पैकिंग में आने वाली इन खाद्य सामग्रियों की कीमत भी बाजार से कम रखी गई थी. इसका उद्देश्य लोगों को रियायती दर पर शुद्ध सामग्री मुहैया करवाना था.

अन्नपूर्णा भंडार से जमकर लूटी थी वाहवाही
बहरहाल, तत्कालीन सरकार ने अन्नपूर्णा भंडार शुरू करके खूब वाहवाही लूटी लेकिन अन्नपूर्णा भंडारों पर मिलने वाला सामान बाजार की कीमतों से मिलने के कारण फ्लॉप साबित हुए. अब सरकार की मंशा है कि आमजन को गुणवत्ता के साथ एक छत के नीचे सस्ती पीडीएस और नॉन पीडीएस सामग्री मिल सके, उसके लिए स्टडी के लिए अलग अलग टीमों को भेजा गया है. जल्द ही राशन की दुकानों पर पहुंचने वाले उपभोक्ताओं को अपनी रोजमर्रा की सामग्री भी मिल सकेगी.