बिहार से गुजरात के लिए हो रही थी बाल तस्करी, कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए नाबालिग

बाल कल्याण समिति की रेलवे चाइल्ड लाइन ने कार्रवाई कर इन्हें पटना से अहमदाबाद जा रही अज़ीमबाद एक्सप्रेस ट्रेन से रेस्क्यू किया है. 

बिहार से गुजरात के लिए हो रही थी बाल तस्करी, कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए नाबालिग
ये बाल श्रमिक हर जानकारी ग़लत दे रहे हैं.

कोटा: बाल श्रम को रोकने के लिए कठोर क़ानून हैं लेकिन देश में इसका जितना माखौल बनता है, वह सड़क से लेकर चौराहों और फुटपाथ से लेकर दुकानों में नज़र आता है. कोटा में ऐसे ही कई नाबालिग बाल श्रमिक पकड़े गए, जिन्हें बिहार से गुजरात बाल श्रम के लिए ले जाया जा रहा था.

जिस उम्र में हाथों में किताबें होनी चाहिए, जिस उम्र में भविष्य की नींव डाली जानी हो, जिस उम्र में भविष्य का मुक़ाम लिखा जा रहा हो, उस उम्र में उन्हें बाल श्रम के दलदल में धकेला जा रहा है.

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झूठी बातें... झूठे सपने और इनके साथ इनके भविष्य से खिलवाड़ के खेल की इबारत लिखी जा रही है. कोटा रेलवे स्टेशन पर ये नाबालिग़ बच्चे बिहार के अलग-अलग जिलों से गुजरात के अलग शहर में फैक्ट्रियों से लेकर मज़दूरी और होटल ढाबों में काम करने के लिए ले जाए जा रहे हैं. 

बाल कल्याण समिति की रेलवे चाइल्ड लाइन ने कार्रवाई कर इन्हें पटना से अहमदाबाद जा रही अज़ीमबाद एक्सप्रेस ट्रेन से रेस्क्यू किया है. इनसे पूछताछ हो रही है. इनसे जानकारी जुटाई जा रही है लेकिन लाने वाले लोगों ने इनका इस हद तक ब्रेन वाश कर रखा है कि ये बाल श्रमिक हर जानकारी ग़लत दे रहे हैं.

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अब कई सवाल हैं, जिन पर पड़ताल शुरू की जा रही है. आख़िर कब से इस तरह एक राज्य से दूसरे राज्य बाल श्रमिकों को ले जाने का खेल चल रहा है. आख़िर कैसे बच्चों के भविष्य को अंधेरे में धकेलने का काम चल रहा है और ऐसे कितने बच्चे हैं, जो भेज दिए गए हैं?