रणथंभौर नेशनल पार्क में चीतल का शिकार, फोटो ट्रेप कैमरे में कैद हुए शिकारी

भैरूपुरा के जंगलों में शिकारियों द्वारा चीतल का शिकार करने का मामला सामने आया है. 

रणथंभौर नेशनल पार्क में चीतल का शिकार, फोटो ट्रेप कैमरे में कैद हुए शिकारी
रणथंभौर नेशनल पार्क

अरविन्दसवाई माधोपुर: बाघों की अठखेलियों को लेकर विश्व प्रसिद्ध सवाई माधोपुर का रणथंभौर नेशनल पार्क एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार मामला वन क्षेत्र में शिकार से जुड़ा हुवा है. रणथंभौर बाघ परियोजना के भैरूपुरा के जंगलों में शिकारियों द्वारा चीतल का शिकार करने का मामला सामने आया है. इतना ही नहीं शिकारियों की यह करतूत फोटो ट्रेप कैमरे में कैद हो गई, जिसमें शिकारी चीतल का शिकार करने के बाद उसे लकड़ी पर बांध कर कंधों पर डालकर ले जाते हुवे दिखाई दे रहे हैं. 

वन अधिकारी मामले को दबाने के प्रयास में लगे हुए हैं. शिकारियों द्वारा शिकार का यह मामला रणथंभौर बाघ परियोजना की फलौदी रेंज के भैरूपुरा के वन क्षेत्र का बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार विगत 21 जनवरी को तीन बंदूकधारी शिकारी वन क्षेत्र में घुसे और बंदूक से फायर कर चीतल का शिकार किया और फिर चीतल के पैरों को लकड़ी पर बांध कर, लकड़ी को कंधों पर उठाकर चीतल को ले गए. 

इतना ही नहीं वन विभाग के फोटो ट्रेप कैमरे में कैद हुई शिकारियों की फोटो में बंदूक भी साफ दिखाई दे रही है. रणथंभौर के जंगलों में शिकारियों द्वारा शिकार करने का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मचा हुवा है और वन अधिकारी विभाग की किरकिरी होने को लेकर गुपचुप तरीके से घटना की जांच में लगे हुए हैं. 

वहीं, मामले की शिकायत वनमंत्री तक भी पहुंच गई, जिसे लेकर पिछले दिनों वन मंत्री सुखराम विश्नोई ने रणथंभौर का दौरा किया था और व्यवस्थाओं का जायजा लिया था, मगर सब कुछ जानकर भी वन मंत्री द्वारा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई. वहीं, मामले को लेकर वन विभाग का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. 

गौरतलब है कि रणथंभौर में वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा करीब 60 करोड़ रुपये लागत से डिजिटल वाईल्ड लाईफ सर्विलांस सिस्टम लगाया गया है, जिसके माध्यम से रणथंभौर का पूरा जंगल डिजिटल कैमरों से लैस है. बावजूद इसके रणथंभौर वन प्रशासन द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

वनमंत्री द्वारा भी मॉनिटरिंग सिस्टम में खामी पकड़ी गई थी, जिसे लेकर वनमंत्री द्वार सिस्टम ऑपरेटर और वनाधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई गई थी. रणथंभौर में शिकारियों द्वारा शिकार का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पूर्व भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं. मगर बड़ी बात ये है कि 60 करोड़ रुपये का मॉनिटरिंग सिस्टम लगने के बाद भी वन प्रशासन द्वारा शिकार जैसी गंभीर मामलों पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा. साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय विभाग के आलाधिकारी गुपचुप तरीके से मामले कि जांच में लगे हुए हैं और मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं.