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Chittorgarh Fort: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में इतिहास की गौरवगाथा, शौर्य की पहचान और राजस्थान की आन-बान-शान चित्तौड़गढ़ दुर्ग एक बार फिर सैलानियों से गुलजार नजर आया. रविवार की छुट्टी और ठंड के सुहावने मौसम के चलते सुबह से ही दुर्ग क्षेत्र में चहल-पहल बनी रही. देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में चित्तौड़गढ़ पहुंचे.
परिवार, युवा और बुजुर्ग सभी दुर्ग की भव्यता, विशाल प्राचीरों और गौरवशाली इतिहास को करीब से महसूस करते नजर आए. रविवार होने के कारण आज चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक भीड़ देखने को मिली. विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ, पद्मिनी महल, मीरा मंदिर और गौमुख कुंड जैसे प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटक पूरे दिन भ्रमण करते नजर आए.
किले की ऊंची प्राचीरें, प्राचीन स्थापत्य कला और राजपूती शौर्य की गाथाएं पर्यटकों को खासा आकर्षित करती रहीं. बच्चों के साथ आए परिवारों के लिए यह भ्रमण न केवल मनोरंजन बल्कि इतिहास से जुड़ने का भी अवसर बना. ठंड के मौसम और साफ आसमान ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग की खूबसूरती को और भी निखार दिया. दुर्ग की ऊंचाई से दिखता पूरा शहर, आसपास की हरियाली और ऐतिहासिक संरचनाएं पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करती रहीं.
जगह-जगह मौजूद गाइड पर्यटकों को किले से जुड़े शौर्य, बलिदान और राजवंशों के इतिहास की जानकारी देते रहे, जिससे सैलानियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला. चित्तौड़गढ़ दुर्ग की प्रसिद्धि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रही है. बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक यहां के इतिहास, स्थापत्य और संस्कृति को नजदीक से जानने पहुंचे.
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राजपूती परंपराएं, रानी पद्मिनी की गाथाएं और मेवाड़ का शौर्य विदेशी सैलानियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. पर्यटकों की बढ़ती आमद का असर स्थानीय पर्यटन व्यवसाय पर भी साफ नजर आया. गाइड, ऑटो-टैक्सी चालक, कैफे संचालक और स्मृति चिन्ह बेचने वाले दुकानदारों में खासा उत्साह दिखा.
वहीं प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को लेकर पूरी सतर्कता बरती गई, ताकि पर्यटकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. कुल मिलाकर रविवार की छुट्टी और ठंड के सुहावने मौसम ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग को एक बार फिर पर्यटन के केंद्र में ला खड़ा किया है. इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का यह अनूठा संगम देश-विदेश से आए सैलानियों को लगातार अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. चित्तौड़गढ़ दुर्ग आज भी भारत की गौरवशाली विरासत का जीवंत प्रतीक बना हुआ है.
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