Rajasthan News: चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर योग दिवस इस बार बारिश के बीच मनाया गया, लेकिन जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं आई. ऐतिहासिक विजय स्तंभ के सामने जिला स्तरीय आयोजन में जब छाते ताने हुए लोगों ने योग किया.
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International Yoga Day: चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर योग दिवस इस बार बारिश के बीच मनाया गया, लेकिन जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं आई. ऐतिहासिक विजय स्तंभ के सामने जिला स्तरीय आयोजन में जब छाते ताने हुए लोगों ने योग किया, तो ये नज़ारा अपने आप में प्रेरणादायक बन गया. मंत्री, सांसद, प्रशासनिक अधिकारी और आमजन सभी ने इस आयोजन में भाग लिया.
सुबह 7 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम
शनिवार सुबह 7 बजे चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक दुर्ग पर विजय स्तंभ और जौहर स्थली गार्डन योग से सराबोर हो गए. "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य" थीम पर 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया. जिला प्रशासन और आयुर्वेद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए आयोजन में स्काउट-गाइड, एनसीसी कैडेट्स, स्कूल छात्र, समाज संगठन और बड़ी संख्या में आमजन ने भाग लिया. बारिश के बावजूद लोग पूरे जोश से योग करते दिखे.
बारिश के कारण कार्यक्रम जल्दी हुआ खत्म
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 7 बजे हुई, लेकिन बारिश के कारण इसे 15-20 मिनट में समेटना पड़ा. फिर भी लोगों का उत्साह बरकरार रहा. महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी योगाभ्यास में जुटे दिखे. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार की मंत्री मंजू बाघमार थीं. उनके साथ सांसद सीपी जोशी, विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, कलेक्टर आलोक रंजन, एडीएम प्रभा गौतम, बीनू देवल सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.
क्या बोले कलेक्टर आलोक रंजन?
कलेक्टर आलोक रंजन ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर जिले के सभी प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए. यह आयोजन केवल शारीरिक स्वास्थ्य का संदेश नहीं देता, बल्कि मानसिक शांति और अनुशासन को भी बढ़ावा देता है. चित्तौड़गढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थलों से जब यह संदेश निकलता है, तो यह हमारी परंपरा और संस्कृति से जुड़कर स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देता है.
छाते के साथ लोगों ने किया योग
भारी बारिश के बावजूद जब शहरवासी छाते लेकर योग करते नज़र आए तो यह साफ हो गया कि योग अब एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. कार्यक्रम में शामिल डॉ. दीपाली, वीणा दशोरा और श्रवण सिंह राव जैसे आम नागरिकों ने भी योग के प्रति अपना समर्पण दिखाया. इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि योग अब जन-आंदोलन बन गया है.
साधना जैसे पल हुए प्रतीत
चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक धरोहर पर जब आसमान से बारिश बरस रही थी और ज़मीन पर लोग छाते ताने योग कर रहे थे, तो वो पल एक साधना जैसा प्रतीत हुआ. विजय स्तंभ और जौहर स्थली जैसे स्थलों से निकला यह योग संदेश न सिर्फ शरीर और मन की शुद्धि की प्रेरणा देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि चित्तौड़गढ़ के लोग परंपरा, प्रकृति और प्राणायाम को कितना महत्व देते हैं. इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि योग अब केवल एक दिन की औपचारिकता नहीं, बल्कि जन-जन की जीवनशैली बन चुका है. बारिश हो या बाधा, जब मन में संकल्प और शरीर में ऊर्जा हो, तो योग हर परिस्थिति में संभव है. चित्तौड़गढ़ ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है संस्कृति से जुड़कर स्वस्थ जीवन जिएं.
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