दिसंबर के पहले सप्ताह में शुरू होगी गुलदाउदी प्रदर्शनी, 50 किस्मों से सजेगी राजस्थान यूनिवर्सिटी

34वीं गुलदाउदी की तीन दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन संभवतः 5 दिसंबर को होने जा रही है, जिसकी तैयारियों को अंतिम रूप राजस्थान यूनिवर्सिटी की नर्सरी में दिया जा रहा है. 

दिसंबर के पहले सप्ताह में शुरू होगी गुलदाउदी प्रदर्शनी, 50 किस्मों से सजेगी राजस्थान यूनिवर्सिटी
इस साल गुलदाउदी की करीब 50 किस्मों को तैयार किया गया है.

जयपुर: उत्तर भारत की एक मात्र यूनिवर्सिटी जहां हर साल गुलदाउदी (Chrysanthemum) की प्रदर्शनी लगती है और वो है राजस्थान यूनिवर्सिटी (Rajasthan University). 5 दिसंबर से राजस्थान यूनिवर्सिटी में लगने वाली तीन दिवसीय गुलदाउदी की प्रदर्शनी में इस साल करीब तीन हजार से ज्यादा गमलों की खेप तैयार की गई है.

साथ ही इस साल गुलदाउदी की करीब 50 किस्मों को तैयार किया गया है हालांकि इस साल राजस्थान यूनिवर्सिटी की लापरवाही और बजट के अभाव के चलते महज 3 हजार गमलों की खेप ही तैयार की गई है, जिसके चलते गुलदाउदी के चहेतों को निराश जरुर होना पड़ सकता है.

यूनिवर्सिटी में 34वीं गुलदाउदी की तीन दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन संभवतः 5 दिसंबर को होने जा रही है, जिसकी तैयारियों को अंतिम रूप राजस्थान यूनिवर्सिटी की नर्सरी में दिया जा रहा है. उद्घाटन समारोह में कुलपति आरके कोठारी, नर्सरी इंचार्ज रामोतार शर्मा सहित यूनिवर्सिटी के शिक्षक और स्टाफ मौजूद रहेंगे.

इस साल अच्छी बारिश ने नर्सरी को एक नई जान तो दी लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही के चलते नर्सरी को गमले ही नहीं मिल सके. इसके बाद नर्सरी के पास मौजूद करीब 3 हजार पौधों की खेप ही तैयार की गई तो वहीं करीब 2 हजार पौधों की खेप अभी भी नर्सरी की जमीन पर ही लगी पड़ी है, जो इस साल बिक्री के लिए तैयार नहीं हो पाई. नर्सरी इंचार्ज रामोतार शर्मा ने बताया कि इस साल बजट के अभाव में गमले समय पर नहीं मिल पाए, जिसके चलते 3 हजार गमलों की खेप ही तैयार की गई, लेकिन जो खेप तैयार की गई है. वो काफी अच्छी खिली हुई है. साथ ही 5 और 6 दिसंबर को आम जनता के लिए प्रदर्शनी के लिए नर्सरी को खोला जाएगा और 7 दिसंबर को गुलदाउदी की बिक्री सुबह 9 बजे से की जाएगी.

राजस्थान यूनिवर्सिटी की नर्सरी में पिछले 34 सालों से अपनी सेवाएं दे रहे गार्डनर धन्नाराम ने बताया कि अच्छी बारिश के चलते गुलदाउदी की करीब 5  हजार पौधों की खेप तैयार की गई थी लेकिन गमले नहीं मिलने की वजह से महज 3 हजार गमले ही तैयार हो पाए हालांकि जो भी खेप तैयार हुई है वो काफी अच्छी है और लोगों को इस बार 50 किस्मों की पसंद चुनने का मौका मिल सकेगा.

बहरहाल, एक समय करीब 7 से 8 हजार गमलों की खेप तैयार करने वाली राजस्थान यूनिवर्सिटी की नर्सरी अब 3 हजार गमलों तक पहुंच गई है और ऐसा सिर्फ राजस्थान यूनिवर्सिटी की गलती की वजह से हो रहा है. इस साल यूनिवर्सिटी की ये गलती गुलदाउदी के चाहनों वालों पर भी भारी पड़ती हुई नजर आ रही है.