चुरू: सेना में भर्ती होने के लिए युवाओं ने उठाया यह कदम, 30 लाख किए खर्च...

सरदारशहर में सेना की तैयारी के लिए किसी प्रकार की कोई सुविधाएं सार्वजनिक स्तर पर नहीं थी. जिसके कारण यहां के युवाओं ने अपने निजी स्तर पर तमाम व्यवस्थाएं माकूल करने की सोची. 

चुरू: सेना में भर्ती होने के लिए युवाओं ने उठाया यह कदम, 30 लाख किए खर्च...
ट्रैक पर रोजाना सैकड़ों युवा सुबह-शाम दौड़ की तैयारी कर रहे हैं.

मनोज प्रजापत/चुरू: सरदारशहर तहसील में लगातार सेना में युवाओं का चयन तेजी से हो रहा है. यह जज्बा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. यह कारण है कि 30 लाख रूपए सरदारशहर तहसील के युवाओं ने जोड़कर सेना तैयारी का ग्राउंड तैयार किया है.

खबर के मुताबिक, सरदारशहर  में सेना की तैयारी के लिए किसी प्रकार की कोई सुविधाएं सार्वजनिक स्तर पर नहीं थी. जिसके कारण यहां के युवाओं ने अपने निजी स्तर पर तमाम व्यवस्थाएं माकूल करने की सोची. एसबीडी राजकीय महाविद्यालय के पीछे के खेल मैदान में एक भव्य और विशाल 400 मीटर का दौड़ने का ट्रैक तैयार करवाने के साथ विभिन्न प्रकार के सेना में शारीरिक दक्षता के पैमानों के उपकरण भी यहां पर लगाए गए हैं. 

यहां विभिन्न प्रकार के व्यायाम, लंबी कूद, ऊंची कूद जैसी सुविधाएं माकूल की गई है. इसी के साथ यहां पर अनेक प्रकार की और व्यवस्था करने के साथ 30 लाख रूपए सरदारशहर  तहसील के युवाओं ने जोड़कर एक प्राइवेट एकेडमी से बहुत ज्यादा अच्छा ट्रैक तैयार करके प्राइवेट एकेडमी को ठेंगा दिखा दिया है. इस ट्रैक पर रोजाना सैकड़ों युवा सुबह-शाम दौड़ की तैयारी करते हुए नजर आ रहे हैं.

वहीं, इन युवाओं का नेतृत्व कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष के हंसराज सिद्ध द्वारा किया गया. सिद्ध ने युवाओं की टीम के दम पर यह सब कर दिखाया. निश्चित रूप से आने वाले समय में सैंकड़ों ही नहीं हजारों युवा सेना में जाकर देश की रक्षा इसी जज्बे से करेंगे. हंसराज सिद्ध ने बताया कि आज से कुछ समय पहले सेना भर्ती तैयारी के लिए युवा सड़कों पर दौड़ते थे. एक दिन दौड़ते समय एक युवा अज्ञात वाहन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई. जिसके बाद उन्होंने मन में ठान लिया की अगर युवाओं के मन में देशभक्ति का जज्बा है तो वह युवाओं के लिए आगे आएंगे. 

जिसके बाद, हंसराज सिद्ध ने सेना भर्ती ट्रैकिंग रणनीति शुरू की. राजकीय एसबीडी कॉलेज के पीछे खेल ग्राउंड खाली पड़ा था. कॉलेज प्रशासन से बात कर प्रशासन की मंजूरी ली और भामाशाह के सहयोग से ट्रैक का निर्माण शुरू करवाया. आज युवाओं को सड़कों की बजाए इस ट्रैक पर दौड़ता देख हंसराज सिद्ध अति प्रसन्न होते हैं.