Panchayat Election Result को लेकर CM Gehlot का बयान, Corona के चलते नहीं किया प्रचार

21 जिलों की 222 पंचायत समितियों पर हुये मतदान में से कांग्रेस (Congress) को बीजेपी (BJP) से ज्यादा मत मिले हैं. कांग्रेस (Congress) को 40.87% वोट मिले हैं जबकि बीजेपी को 40.58% वोट ही मिले हैं.

Panchayat Election Result को लेकर CM Gehlot का बयान, Corona के चलते नहीं किया प्रचार
सीएम अशोक गहलोत.

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) केंद्रीय मंत्रियों पर राजस्थान (Rajasthan) में आए जिला परिषद (Zila Parishad) और पंचायत समिति चुनावों (Panchayat Samiti Elections) के परिणाम पर किसान आंदोलन (Farmers Agitation) को फीका करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा है कि बीजेपी (BJP) इन नतीजों को अपनी बड़ी जीत की तरह प्रदर्शित कर रही है, जो आंकड़ों के विश्लेषण में गलत साबित होता है.

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21 जिलों की 222 पंचायत समितियों पर हुये मतदान में से कांग्रेस (Congress) को बीजेपी (BJP) से ज्यादा मत मिले हैं. कांग्रेस (Congress) को 40.87% वोट मिले हैं जबकि बीजेपी को 40.58% वोट ही मिले हैं. कांग्रेस (Congress) को बीजेपी से 0.29% ज्यादा वोट मिले हैं. 222 पंचायत समितियों में बीजेपी और कांग्रेस (Congress) के बराबर 98-98 और अन्य पार्टियों के 26 प्रधान चुने गये हैं. 2015 में इन पंचायत समितियों में बीजेपी के 112 और कांग्रेस (Congress) के 67 प्रधान थे. कांग्रेस (Congress) के प्रधानों की संख्या पहले से 31 बढ़ी है जबकि बीजेपी के प्रधानों की संख्या 14 कम हुई है. 

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बीजेपी का वोट करीब 18 प्रतिशत प्रतिशत कम हुआ
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा है कि 2015 में इन 21 जिला परिषदों में बीजेपी को 48.87% वोट मिले थे लेकिन इस बार सिर्फ 43.81% वोट ही बीजेपी को मिले हैं, जो पिछली बार से 5 प्रतिशत कम हैं. कांग्रेस (Congress) को 42.76% वोट प्राप्त हुये हैं. जो बीजेपी से महज 1.05% प्रतिशत कम हैं. 2019 के लोकसभा चुनावों से तुलना करें तो इन जिलों वाली लोकसभा सीटों पर बीजेपी को लगभग 61.05% वोट मिले थे. लोकसभा चुनाव से जिला परिषद चुनावों के 18 महीनों में बीजेपी का वोट करीब 18 प्रतिशत प्रतिशत कम हुआ है. 2015 में बीजेपी के इन 21 जिलों में 14 जिला प्रमुख थे लेकिन इस बार बीजेपी के 13 जिला प्रमुख बन सके हैं. इन 21 जिला परिषदों में से बीजेपी 2015 की तुलना में सिर्फ 5 जिला परिषदों में पिछली बार से ज्यादा बॉर्ड जीत पाई है. बाकी 16 जिला परिषदों में उसके जीते गये वॉरडं की संख्या 2015 से कम है. 

कोरोना महामारी पर था राजस्थान सरकार का ध्यान
सीएम ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान राजस्थान सरकार का पूरा ध्यान महामारी की रोकथाम पर था. इसलिये कांग्रेस (Congress) ने प्रदेश स्तर और केंद्रीय स्तर के नेताओं को इन चुनावों में प्रचार करने के लिये नहीं भेजा, जिससे भीड़ इकट्ठा न हो और इस महामारी का फैलाव रुक सके. वहीं बीजेपी (BJP) के केंद्रीय मंत्री तक इन चुनावों में प्रचार के लिये उतर गये. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कैलाश चौधरी, अर्जुन मेघवाल, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर समेत कई नेताओं ने चुनाव प्रचार में कोरोना के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं और अपनी राजनीति के लिये आमजन के जीवन को खतरे में डाला.

कोरोना प्रॉटोकोल तोड़ने का गलत उदाहरण पेश किया
जब हमारे प्रदेश के 2500 लोग और दो विधायक कोरोना के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं, तब हम सबकी जिम्मेदारी है कि कोरोना संक्रमण को गंभीरता से लिया जाए लेकिन बीजेपी (BJP) के नेताओं ने कोरोना संक्रमण का ध्यान नहीं रखा. चुनावों में जीत के लिये बीजेपी (BJP) नेताओं ने आमजन के सामने कोरोना प्रॉटोकोल तोड़ने का गलत उदाहरण पेश किया. जब हमारा सारा ध्यान जीवन और आजीविका बचाने पर था तब बीजेपी (BJP) नेताओं के लिये राजनीति जरूरी थी. हैदराबाद के नगर निगम चुनावों में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों का जाकर कोरोना प्रॉटोकोल का उल्लंघन करना इनकी सोच दर्शाता है. यह दिखाता है कि बीजेपी (BJP) चुनाव जीतने के लिये आमजन के जीवन से भी समझौता कर सकती है.

बीजेपी (BJP) के केंद्रीय और प्रदेश के नेताओं ने चुनाव नतीजों को भ्रामक रूप से मीडिया के सामने प्रचारित कर ऐसा हौवा खड़ा करने की कोशिश की कि जैसे कांग्रेस (Congress) का सफाया हो गया हो. राजस्थान के किसानों ने बीजेपी (BJP) को 18 महीनों में 18 प्रतिशत कम वोट देकर किसान आंदोलन का साथ दिया है. राजस्थान के किसान पूरी तरह नये कृषि कानूनों के खिलाफ हैं, इसलिये उन्होंने बीजेपी (BJP) के विरोध में वोट किया है.