कोटा में बच्चों की मौत पर सचिन पायलट के साथ दिखे CM,कहा-'बात को गंभीरता से लेने की जरूरत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि सरकार में कोई अधिकारी हो, मंत्री हो मुख्यमंत्री हो उनकी बात को सुनना चाहिए. जहां सिस्टम में कमी है उसे दूर करना चाहिए. 

कोटा में बच्चों की मौत पर सचिन पायलट के साथ दिखे CM,कहा-'बात को गंभीरता से लेने की जरूरत
CM ने कहा जहां सिस्टम को ठीक करने की जरूरत होगी वहां सिस्टम ठीक किया जाएगा.

जयपुर: राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के बीच चल रहे जवाबदेही के मामले को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़प्पन भरा बयान आया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सचिन पायलट हमारे डिप्टी सीएम भी हैं और पीसीसी प्रेसीडेंट भी हैं, इसलिए उनके दो अधिकार हैं. हम लोगों को उनकी बात को गंभीरता से लेने की जरूरत है. 

साथ ही सीएम ने कहा कि पीसीसी प्रेसीडेंट होता है. उसके पद की एक गरिमा होती है और पीसीसी प्रेजिडेंट बोलता है कमेंट करता है तो सरकार को चाहिए सरकार के नुमाइंदों को चाहिए उनकी बातों को, उनके सुझावों को गंभीरता से लें. उस पर एक्शन करें. 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि सरकार में कोई अधिकारी हो, मंत्री हो मुख्यमंत्री हो उनकी बात को सुनना चाहिए. जहां सिस्टम में कमी है उसे दूर करना चाहिए. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा पीसीसी प्रेसिडेंट की जो भूमिका होती है उसमें उनको खुलकर अपनी बात करनी चाहिए कि मुझे सिस्टम में यहां कमी महसूस हो रही है. अगर विपक्ष कहने का अधिकार रखता है तो सत्ता पक्ष का अध्यक्ष भी, उसको अधिकार होना चाहिए क्योंकि उसकी खुद की गवर्नमेंट है. 

साथ ही सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि विपक्ष तो कई बार आलोचना करता है लेकिन पार्टी अध्यक्ष को अधिकार है कि वो अपनी बात कहे, सुझाव दे, सुझाव भी दे साथ में क्या-क्या इंप्रूवमेंट हो सकता है. गहलोत ने कहा है कि अगर सचिन पायलट मुझे बताएंगे वो फीडबैक देंगे तो मैं तत्काल प्रभाव से एक्शन लूंगा, जांच करवा लूंगा. जहां सिस्टम को ठीक करने की जरूरत होगी वहां सिस्टम ठीक किया जाएगा.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है मेरी मंशा है कि प्रदेश में सुशासन हो. मामला पक्ष-विपक्ष का नहीं है. जरूरी है कि सुशासन कैसे हो, जिसके लिए हम चुनकर आते हैं. संवेदनशील, जवाबदेह, पारदर्शी प्रशासन मिले जनता को, प्रदेशवासी आपसे अपेक्षा करते हैं. जब उसमें कमी होती है या गलतफहमी होती है तो लोग निराश होते हैं. तो हमारी जिम्मेदारी ज्यादा बनती है विपक्ष से भी. हम लोग सत्ता में हैं, कैसे हम लोग मिलकर चलें जिससे कि गुड गवर्नेंस देने में हम लोग कामयाब हो सकें.