CM गहलोत की अगले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की प्लानिंग शुरू, बनाई ये रणनीति

सीएम की रणनीति के तहत सबसे पहले पंचायतों का पुनर्गठन कर कांग्रेस का गांवों से खिसकता जनाधार वापस पाने की कोशिश होगी. मुख्यमंत्री गहलोत मानते हैं कि असल में लोकतंत्र को मजबूत करना है तो गांवों- पंचायतों तक ज्यादा से ज्यादा विकास और सुविधाएं पहुंचाई जाए.

CM गहलोत की अगले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की प्लानिंग शुरू, बनाई ये रणनीति
पंचायत पुनर्गनठन से जनता को भी काफी फायदा होगा.

नई दिल्ली: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने बीजेपी को टक्कर देने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है. राजस्थान में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने नए सिरे से वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों से लड़ने के लिए पार्टी को मजबूत करने की रणनीति  बना ली है. 

सीएम की रणनीति के तहत सबसे पहले पंचायतों का पुनर्गठन कर कांग्रेस का गांवों से खिसकता जनाधार वापस पाने की कोशिश होगी. मुख्यमंत्री गहलोत मानते हैं कि असल में लोकतंत्र को मजबूत करना है तो गांवों- पंचायतों तक ज्यादा से ज्यादा विकास और सुविधाएं पहुंचाई जाए.

गहलोत सरकार की पंचायत पुनर्गठन की कवायद को सिर्फ़ पंचायत चुनावों तक ही सीमित करके नहीं देख सकते. कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा को टक्कर देने के लिए अभी से कई साल आगे तक की सोच और रणनीति रखनी होगी. इसलिए पंचायतों का परिसीमन कर मुख्यमंत्री गहलोत ने अगले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए अभी से लंबी प्लानिंग शुरू कर दी है. 

खोया जनाधार वापस पाने की कोशिश
जाहिर है गहलोत सरकार ताबड़तोड़ कई योजनाएं ला रही है और आम जनता के बीच उनकी जानकारी देने के लिए कांग्रेस के पास सत्ता के आख़िरी छोर तक अपने लोग होना बेहद ज़रूरी है. साथ ही कांग्रेस का खोया जनाधार वापस पाने और उसे अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भुनाने की राह में मुख्यमंत्री गहलोत की यह रणनीति महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

48 नई पंचायत समितियां भी गठित की गईं 
राज्य सरकार ने बहुप्रतिक्षित पंचायत और पंचायत समितियों के पुनर्गठन को हरी झंडी देते हुए 16 नवंबर को इसकी अधिसूचना जारी की जिससे प्रदेश में 1,264 नए सरपंचों के लिए पूरी राजनीतिक जमीन तैयार हो गई है. वहीं 48 नई पंचायत समितियां भी गठित की गई हैं. सरकार की ओर से जारी इस अधिसूचना के बाद, अब प्रदेश में कुल 11,152 ग्राम पंचायतें और 346 पंचायत समितियां हो गई हैं. इससे पहले ग्राम पंचायतों का आंकड़ा 9,888 और पंचायत समितियां 295 थी. अधिसूचना जारी होने के बाद ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन के लिए लंबी कवायद की थी. उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की अध्यक्षता में कैबिनेट सब कमेटी और जिला कलेक्टर्स की ओर से भेजे गए प्रस्तावों का अध्ययन कर उस पर मंथन किया. कमेटी ने भी करीब 10 मैराथन बैठकें कर नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों के पुनर्गठन की फाइल मुख्यमंत्री गहलोत की मुहर के लिए भेजी थी. 

आपको बता दें कि पंचायत पुनर्गनठन से जनता को भी काफी फायदा होगा. पुनर्गठन से जहां मतदाताओं के प्रतिनिधित्व में बढ़ोतरी होगी. वहीं गांवों में पहले से कहीं ज्यादा अनुदान पहुंचेगा. इसके साथ ही आख़िरी छोर पर खड़े मतदाता की ज़रूरतों के साथ सही मायने में न्याय भी हो पाएगा.

Edited by: Pooja Sharma, News Desk