आपदा के समय ड्रोन से नजर रखेंगे कलेक्टर्स, संसाधनों से लैस होगी SDRF

राहत-बचाव कार्यों के दौरान आपदा राहत फोर्स की ओर से नहीं पहुंच वाली जगहों पर भी अब नजर रखी जा सकेगी.

आपदा के समय ड्रोन से नजर रखेंगे कलेक्टर्स, संसाधनों से लैस होगी SDRF
प्रदेश में आपदा के समय नजर रखने के लिए ड्रोन का सहारा लिया जाएगा.

जयपुर: राहत-बचाव कार्यों के दौरान आपदा राहत फोर्स की ओर से नहीं पहुंच वाली जगहों पर भी अब नजर रखी जा सकेगी, जिससे त्वरित कदम उठाए जा सकेंगे. तुरंत आपदा जैसे संकट पर मौके पर राहत पहुंचाने के लिए राज्य के 13 जिलों में आपदा मित्र बनाए जाएंगे. आपदा प्रबंधन विभाग जल्द ही प्रदेश के सभी 33 जिला कलेक्टर्स को ड्रोन उपलब्ध कराने जा रहा है, जिससे कलेक्टर्स आपदा के समय ड्रोन के जरिए नजर रख सकेंगे और एनडीआरएफ को मजबूत करने के लिए हाईटेक संसाधन मुहैया कराए जाएंगे.

जिलों में ड्रोन से आपदा के समय कलेक्टर्स रखेंगे नजर    
प्रदेश में आपदा के समय नजर रखने के लिए ड्रोन का सहारा लिया जाएगा. साथ ही एनडीआरएफ को हाईटेक संसाधनों से लैस किया जाएगा, जिससे की जल्द से जल्द आपदा राहत कार्य शुरू कर निपटा जा सके. आपदा प्रबंधन की राज्य कार्यकारी समिति की बैठक में मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने प्रस्तावों पर मुहर लगाई. बैठक में निर्णय लिया की प्रदेश के सभी जिला कलक्टर्स को एक-एक ड्रोन उपलब्ध कराया जाएगा.

एडवांस ड्रोन कैमरा पूरे आपदा स्थल पर नजर रख सकेगा. विभिन्न राहत-बचाव अभियान में रेसक्यू टीम को संपर्क मार्ग बाधित होने पर पहुंचना मुश्किल होता है. रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने के लिए उनको घटनास्थल की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती है. ऐसे में एडवांस ड्रोन कैमरा की मदद से आपदा राहत दल घटनास्थल की ग्राउंड रियलिटी का पता लगा सकेगी. सचिवालय में हुई बैठक में आपदा प्रबंधन सचिव सिद्धार्थ महाजन सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे.

8 करोड़ 66 लाख के संसाधनों से SDRF होगी मजबूत  
प्रदेश में प्राकतिक आपदा और वर्षा जनित आपदाओं से निपटने एसडीआरएफ को मजबूत किया जाएगा. इसके लिए सरकार ने एसडीआरफ (SDRF) को 8 करोड़ 66 लाख रूपए देने का फैसला लिया गया. इस राशि से आपदा के समय काम आने वाले हाईटेक जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे साथ ही एसडीआरएफ (SDRF) में काम करने वाले लोगों को और अच्छा प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके अलावा करीब ढ़ाई करोड़ रूपए खर्च कर पीडब्लयूडी, वन विभाग, आयुर्वेद, मेडिकल हैल्थ और एसडीआरफ कर्मियों को आपदा से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी. बैठक में फैसला लिया की रीको औद्योगिक इलाकों में आग बुझाने के लिए दस दमकल की गाड़ियों की खरीद होगी, जिसको चलाने का काम सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक पायलट का काम करेंगे और खर्चा रीको उठाएगा.

13 जिलों में आपदा जैसे संकट के समय राहत पहुंचाने के लिए 'आपदा मित्र'  
प्रदेश के 13 जिलों में आपदा मित्र बनाने पर भी निर्णय हुआ. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा दोबारा आपदा मित्र स्कीम को देश के 350 जिलों में लागू करने का प्रस्ताव किया गया है, जिसके तहत राजस्थान के 13 जिलों में अजमेर, अलवर, बीकानेर, भरतपुर, जालोर, जोधपुर, जयपुर, झालावाड, कोटा, नागौर, पाली और सिरोही शामिल है आपदा मित्र स्वयंसेवक बनने के बाद उन्हें आपदा रेस्पोंडर किट भी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से दिया जाएगा. 

बहरहाल, बाढ़, सूखा, भूकम्प जैसी आपदा समय-समय पर आती ही रहती हैं  और इनके कारण जीवन और सम्पत्ति की बहुत नुकसान होता है. केंद्र से लेकर राज्य सरकार तो अपने स्तर पर आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने का काम रही है, लेकिन यह भी जरूरी है की इन प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने और जहां तक सम्भव हो इन आपदाओं को कम से कम करने के उपाय और साधन खोजे जाने चाहिए.