जयपुर: हेरिटेज निगम में मेयर ने ताक पर रखे नियम, पति ने ली अधिकारियों की क्लास

महापौर मुनेश गुर्जर ने अधिकारियों को विकास का अपना एजेंडा बताया और उसके बाद अधिकारियों से वन टू वन करते हुए महापौर पति सुशील गुर्जर ने मोर्चा संभाल लिया.

जयपुर: हेरिटेज निगम में मेयर ने ताक पर रखे नियम, पति ने ली अधिकारियों की क्लास
महापौर के पति ने ली अधिकारियों की क्लास.

शशि मोहन/जयपुर: कई मामलों में दूसरों को नसीहत देना या सवाल उठाना आसान होता है. लेकिन अगर वही स्थिति किसी पर आन पड़े तो लोग मर्यादा भूल जाते हैं. जयपुर हेरिटेज नगर निगम की पहली महापौर और उनके पति के मामले में भी कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है. अब से पहले कांग्रेस पार्टी लगातार यह कहती रही की सरपंच पति, प्रधान पति और पार्षद पति जैसे पद नामों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए, लेकिन जयपुर हेरिटेज नगर निगम की पहली महापौर और महापौर पति की अधिकारियों के साथ पहली बैठक ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

दरअसल, कांग्रेस की मुनेश गुर्जर जयपुर हेरिटेज नगर निगम की पहली महापौर तो बन गई. लेकिन बैठक लेने के तरीके और उसमें मौजूद लोगों से मुनेश गुर्जर के काम करने के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं. मंगलवार को महापौर के चुनाव में बीजेपी की प्रत्याशी कुसुम यादव को 12 वोट से हराने के बाद मुनेश गुर्जर ने कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शहरों की मौजूदगी में शपथ ली.

शपथ के तत्काल बाद मुनेश ने महापौर के कमरे में कुर्सी पर बैठकर चार्ज भी संभाल लिया. सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के साथ ही विधायक रफीक खान और अमीन कागजी ने मुनेश गुर्जर को महापौर बनने पर शुभकामनाएं दी और कहा कि उन्हें सभी को साथ लेकर राजधानी के विकास में योगदान देना चाहिए. सभी को साथ लेकर चलने का मतलब मुनेश गुर्जर ने शायद अपने पति को हर बैठक में साथ लेने से लगा लिया और शायद यही कारण था कि वरिष्ठ नेताओं के नगर निगम ऑफिस से रवानगी पकड़ते ही अधिकारियों की पहली बैठक बुला ली गई.

मुनेश गुर्जर अपनी जीत के बाद फोटो सेशन करा रही थीं, तभी उनके पति सुशील गुर्जर ने उन्हें बैठक के लिए आने का संकेत देकर महापौर के चेंबर की तरफ रवानगी ले ली. पीछे-पीछे मुनेष गुर्जर ने भी उनकी राह पकड़ ली. महापौर के चेंबर में हेरिटेज नगर निगम के अधिकारियों को भी बुलाया गया. कमिश्नर के साथ ही एक्सईएन और अन्य अधिकारियों को भी बुला लिया गया. यहां पहले तो महापौर मुनेश गुर्जर ने अधिकारियों को विकास का अपना एजेंडा बताया और उसके बाद अधिकारियों से वन टू वन करते हुए महापौर पति सुशील गुर्जर ने मोर्चा संभाल लिया.

महापौर पति ने अधिकारियों से पहला सवाल प्लानिंग डिपार्टमेंट की फाइल्स की लेकर किया. इस पर अधिकारियों का कहना था कि अभी तो प्लानिंग की सभी फाइल्स पुराने दफ्तर में ही हैं. कमिश्नर ने बताता की अभी क्षेत्र के हिसाब से फाइल्स को अलग किया जाएगा और उनके बाद फाइल्स लाई जाएंगी.

महापौर पति आहेल गुर्जर से जब इस मीटिंग में उनकी मौजूदगी को लेकर सवाल किया गया तब उनका कहना था कि वो सलाहकार के रूप में तो इस बैठक में मौजूद रह ही सकते थे. लेकिन सवाल यह है कि जब महापौर के किसी सलाहकार की नियुक्ति ही नहीं हुई तो फिर वे सलाहकार कैसे हुए? सवाल तो यह भी है कि क्या महापौर पति ने मन में यह पहले ही तय कर लिया है कि उन्हें सलाहकार के रूप में नियुक्त होना है और नगर निगम को एक फैमिली वेंचर के रूप में चलाना है?

हालांकि इस पूरे मामले में अधिकारियों का रवैया भी चौंकाने वाला रहा. बैठक में कमिश्नर और इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद किसी भी अधिकारी ने महापौर पति की तरफ से बैठक लेने या उनकी मौजूदगी पर सवाल नहीं उठाया गया.