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राजस्थान में नहीं थम रही कांग्रेस की कलह, विधायक बोले-पायलट होते CM, तो नतीजे दूसरे होते

राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक विधायक ने बुधवार को कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेनी चाहिए.

राजस्थान में नहीं थम रही कांग्रेस की कलह, विधायक बोले-पायलट होते CM, तो नतीजे दूसरे होते
राजस्‍थान कांग्रेस इस समय सचिन पायलट और गहलोत के समर्थन में दो गुटों में बंट चुकी है. फोटो: एएनआई

जयपुर: राजस्‍थान में कांग्रेस की आपसी अंतर्कलह थमने का नाम नहीं ले रही है. दो खेमों में बंटी कांग्रेस के एक विधायक ने अब खुलकर उपमुख्‍यमंत्री सच‍िन पायलट का पक्ष लिया है. उसका कहना है कि अगर राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री सचिन पायलट होते तो लोकसभा में नतीजे दूसरे होते. लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 25 में से एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई है.

राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक विधायक ने बुधवार को कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेनी चाहिए. इसके साथ ही विधायक पृथ्वीराज मीणा ने उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य में सभी 25 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा और उसके बाद से पार्टी में खेमेबाजी और खींचतान चल रही है.

टोडाभीम सीट से कांग्रेस विधायक मीणा ने यहां पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा,' जब पार्टी सत्ता में होती है जो हार की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है और अगर पार्टी विपक्ष में होती है जो यह जिम्मेदारी पार्टी अध्यक्ष की रहती है.'

उन्होंने कहा,' सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए. यह मेरी व्यक्तिगत राय है.' मीणा ने कहा कि वह यह बात पहले भी कह चुके हैं क्योंकि विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हीं के कारण जीती.

बता दें कि मुख्यमंत्री गहलोत ने हाल ही में एक टीवी चैनल को साक्षात्कार में कहा कि प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को कम से कम जोधपुर सीट पर पार्टी की हार की जिम्मेदारी तो लेनी ही चाहिए क्योंकि वह वहां शानदार जीत का दावा कर रहे थे. इसके बाद गहलोत व पायलट के समर्थन में अलग अलग बयान आ रहे हैं.

2014 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस को राजस्‍थान में एक भी लोकसभा सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी. पिछले साल यानी 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने राज्‍य की सत्‍ता में वापसी की थी. लेकिन लोकसभा में उसे बुरी तरह पराजय का सामने करना पड़ा है.