कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान, पार्टी इलेक्शन कमेटी की रिपोर्ट से चौंके आलाकमान

राजस्थान में पिछले 8 लोकसभा चुनाव का इतिहास बताता है कि कांग्रेस यहां एक साथ 25 सीटें नहीं जीत पाई है

कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान, पार्टी इलेक्शन कमेटी की रिपोर्ट से चौंके आलाकमान
बीजेपी पिछली बार मिशन 25 को हासिल करने में कामयाब रही थी

जयपुर: राजस्थान में लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने उम्मीदवारी तय करने की कवायद शुरू कर दी है. प्रदेश में तैयार किए गए पैनल पर आप दिल्ली में मंथन की प्रक्रिया जारी है. तैयार पैनल के साथ-साथ प्रदेश इलेक्शन कमेटी ने भी एक रिपोर्ट कार्ड पार्टी आलाकमान को सौंपा है लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 40 सदस्य की इलेक्शन कमेटी में से आधे सदस्यों में खुद के नाम की ही पैरवी की है यानी जिन लोगों पर चुनाव लड़ाने का जिम्मा है वह खुद लोकसभा के टिकट के जुगाड़ में लगे हुए हैं.

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मिशन 25 को हासिल करने की कवायद में जुटी है. राजस्थान में ऐसे स्पेशल 25 की तलाश की जा रही है जो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को पीएम बनाने के मिशन को पूरा कर सकें. इसके लिए बकायदा जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक रिपोर्ट कार्ड तैयार करवाए गए हैं पर पीसीसी के सर्वे के अलावा एआईसीसी और राहुल गांधी की टीम ने भी निजी सर्वे करवाया है. राजस्थान से 25 सीटों के पैनल तैयार कर दिल्ली भिजवाए जा चुके हैं जिन पर दिल्ली में मंथन की कवायद जारी है. 

पिछले दिनों जयपुर में हुई प्रदेश इलेक्शन कमेटी की बैठक में यह मुद्दा तब उठा था जब पीसी के सदस्यों और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नमो नारायण मीणा ने चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी से इनकार करते हुए कहा था कि वह खुद चुनाव लड़ेंगे. इसके ठीक उलट पार्टी के युवा नेता पवन गोदारा वरिष्ठ नेताओं की जगह युवा और जमीनी वाले नेताओं को टिकट देने की पैरवी कई बैठकों में कर चुके हैं.

प्रदेश इलेक्शन कमेटी के सदस्यों में नमो नारायण मीणा केवल अकेला नाम नहीं है जिसने लोकसभा चुनाव लड़ने की ताल ठोकी हो. चयन समिति के उपाध्यक्ष रामेश्वर डूडी बाड़मेर से लोकसभा चुनाव लड़ने को तैयार हैं, वह पिछले साल दिसंबर में हुए नोखा से विधानसभा चुनाव हार गए थे. इनके अलावा बड़े नेताओं में अलवर से पूर्व सांसद भंवर जितेंद्र सिंह, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान, पूर्व सांसद नरेंद्र बुडानिया, डॉ करण सिंह, नमो नारायण मीणा, डॉ गिरिजा व्यास टिकट के जुगाड़ में लगे हैं.

इनके साथ ही प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हरीश चौधरी, पार्टी के उपाध्यक्ष गोपाल सिंह ईडवा, पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, पूर्व सांसद अश्क अली टांक, यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष पवन गोदारा और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रेहाना रियाज भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं.

राजस्थान में पिछले 8 लोकसभा चुनाव का इतिहास बताता है कि कांग्रेस यहां एक साथ 25 सीटें नहीं जीत पाई है, जबकि बीजेपी पिछली बार मिशन 25 को हासिल करने में कामयाब रही थी. खराब ट्रेक रिकॉर्ड और लगातार कम होते वोट प्रतिशत के बीच चुनाव प्रबंधन में कांग्रेस की खामी भारी साबित हो सकती है निश्चित तौर पर पार्टी आलाकमान को संगठन और बड़ी जिम्मेदारी वाले लोगों और चुनाव लड़ने वाले नेताओं के बीच काम का बंटवारा करना होगा अगर पार्टी ऐसा नहीं कर पाई तो मिशन 25 को हासिल करने में बेहद परेशानी आने वाली है.