कांस्टेबलों को वित्त विभाग से झटका, मांगे मानने से किया इनकार

ग्रेड पे 2400 से 3600 करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सोशल मीडिया पर आंदोलन चला रखे राजस्थान पुलिस के कांस्टेबलों (Constables) को वित्त विभाग (Finance Department ) ने तगड़ा झटका दिया है.

कांस्टेबलों को वित्त विभाग से झटका, मांगे मानने से किया इनकार
प्रतीकात्मक तस्वीर

विष्णु शर्मा, जयपुर: ग्रेड पे 2400 से 3600 करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सोशल मीडिया पर आंदोलन चला रखे राजस्थान पुलिस के कांस्टेबलों (Constables) को वित्त विभाग (Finance Department ) ने तगड़ा झटका दिया है. वित्त विभाग ने कांस्टेबलों की मांग को युक्ति संगत नहीं बताते हुए मानने से इनकार कर दिया है. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मांगी गई टिप्पणी के जवाब में वित्त विभाग की ओर से दिए गए उत्तर में यह इनकार किया गया.

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राजस्थान पुलिस के कांस्टेबल लम्बे समय से थर्ड ग्रेड टीचर्स के समान अपनी ग्रेड पे 2400 से बढ़ाकर 3600 करने की मांग कर रहे हैं. कांस्टेबल पुलिस बल के अनुशासन के कारण आपनी मांगों के लिए खुलकर आंदोलन नहीं कर सकते थे, ऐसे में उन्होंने सोशल मीडिया पर आंदोलन चलाया. आंदोलन के तहत कांस्टेबलों ने डेढ़ सौ से ज्यादा विधायक, सांसद, जन प्रतिनिधियों, समाज संगठनों से अपनी मांग के समर्थन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखवाया. 

ग्रेड पे बढ़ाना युक्तिसंगत नहीं - वित्त विभाग ......
इधर मुख्यमंत्री कार्यालय से इन पत्रों पर वित्त विभाग से टिप्पणी मांगी. इसके जवाब में वित्त विभाग के संयुक्त सचिव सुरेश कुमार की ओर से गुरुवार को जवाब दिया गया. ग्रेड पे 2400 से 3600 करने की मांग पर वित्त विभाग ने मंत्री मंडलीय उप समित और मंत्रालयिक कर्मचारियों के बीच 27 अगस्त 2017 में बनी सहमति का हवाला दिया है. सहमति के बाद प्रशासनिक सुधार विभाग के 20 सितम्बर 2017 को जारी आदेश में विशिष्ट सचिव वित्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने परीक्षण के बाद मांग को युक्ति संगत नहीं माना है. 
 
अन्य भत्ते कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर -- 
कांस्टेबलों की मांग में शामिल अन्य भत्तों के लिए रिटायर्ड आईएएस डीसी सामंत कमेटी की रिपोर्ट लागू होने पर निर्भर बताया है. कांस्टेबलों ने मेस भत्ता 2000 रुपए से बढ़ाकर 4000 रुपए करने, हार्ड ड्यूटी अलाउंस साढे चार रुपए प्रतिघंटे से बढ़कार 10 प्रतिघंटे करने तथा वर्दी भत्ता सात हजार रुपए से बढ़ाकर दस हजार रूपए तथा मोबाइल भत्ता 500 रुपए से बढ़ाकर दो हजार रुपए करने की मांग की थी. इसके जवाब में वित्त विभाग ने कहा कि डीसी सामंत कमेटी ने वेतन विसंगति निवारण कमेटी ने परीक्षण किया है. कमेटी की रिपोर्ट 5 अगस्त 2019 को प्राप्त हो चुकी है जो उच्च स्तर पर विचाराधीन है. भर्ती में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास करने का कार्मिक विभाग तथा गृह जिले में ट्रांसफर 14 साल से कम कर पांच करने का मामला गृह विभाग का है.

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