मजदूरों के साथ इस हद तक हो रही नाइंसाफी, उठ जाएगा इंसानियत से भरोसा

लॉकडाउन लगने से पहले ठेकेदार द्वारा उन्हें दो लाख रुपये तो दे दिए लेकिन उसके बाद उनके दो लाख रुपये और बाकी रह गए. 

मजदूरों के साथ इस हद तक हो रही नाइंसाफी, उठ जाएगा इंसानियत से भरोसा
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जुगल किशोर, अलवर: बहरोड़ क्षेत्र के सोतानाला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित आरपीएस स्कूल में काम करने वाले बिहार के मजदूरों राहुल कुमार, पप्पू कुमार, सन्तोष कुमार, सुधीर शर्मा सहित दो दर्जन से अधिक मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन से पहले वह महेंद्रगढ़ के ठेकेदार सुभाष के पास आरपीएस स्कूल में मजदूरी का काम कर रहे थे.

लॉकडाउन लगने से पहले ठेकेदार द्वारा उन्हें दो लाख रुपये तो दे दिए लेकिन उसके बाद उनके दो लाख रुपये और बाकी रह गए. ऐसे में लॉकडाउन लग जाने के कारण उन्हें स्कूल से बाहर निकाल दिया और उनके लिए न तो खाने पीने की कोई व्यवस्था थी और वह तीन-चार किलोमीटर दूर से पीने के लिए पानी भरकर लाते थे. उन्होंने अपने घर जाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया था, जिसके बाद प्रशासन द्वारा उन्हें फोन किया गया कि उनके घर वापसी जाने का इंतजाम हो गया है लेकिन यहां पर आए तो कहा कि आप की ट्रेन रद्द हो गई है. ऐसे में वह पिछले तीन दिन से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में रह रहे हैं. 

वहीं, आरपीएस स्कूल द्वारा प्रशासन और पुलिस से उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा है कि वह वापस काम पर आ जाएं. वहीं, ठेकेदार सुभाष द्वारा कहा जाता है कि जब वह आगे का काम करेंगे तो वह उनको बाकी के रुपये देगा. ऐसे में वह बिना रुपये लिए ही पैदल अपने घरो को चले जाएंगे. मजदूरों को जब प्रशासन द्वारा दबाव बनाकर आरपीएस स्कूल की बसों में बैठाया जाने लगा तो मजदूर बसों में नहीं बैठकर पैदल ही चल पड़े, जिसके बाद पुलिस कर्मी उन्हें समझा कर स्कूल में लाए.