कोटा: MBS अस्पताल में ठेकेदारी का खेल, मूक बधिरों के टेस्टिंग रूम को बना दिया कुछ और...

ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम में श्रवण-वाक थैरेपी होती है. इससे सुनने की क्षमता की सूक्ष्म जांच की जाती है. इस रूम में बाहरी वातावरण का बिल्कुल भी दखल नहीं रहता.

कोटा: MBS अस्पताल में ठेकेदारी का खेल, मूक बधिरों के टेस्टिंग रूम को बना दिया कुछ और...
श्रवण बाधितों की जांच के लिए अस्पताल के प्रशासनिक ब्लॉक में ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम बनाया जाना था.

मुकेश सोनी, कोटा: एमबीएस अस्पताल में नाक, कान और गला रोग विभाग के लिए मूक बधिरों के लिए ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम बनाना था लेकिन अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के चलते इसकी जगह पर रूम में पार्टिशन कर डॉक्टरों का रूम बना दिया लेकिन इसमें भी 'खेल' हो गया.

इसके चलते ये कमरे डॉक्टरों के बैठने के भी काम नहीं आ रहे. अब अस्पताल के प्रशासनिक ब्लॉक में दबे मुंह ठेकेदारी हुनर पर कानाफूसी हो रही है. आखिर बिना नक्शे नाप और तय मापदंड के किसकी शह पर इसका रिनोवेशन किया गया. मामले में खुलकर कोई भी बोलने को तैयार नहीं है. 

कैसे क्या होता है काम?
ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम में श्रवण-वाक थैरेपी होती है. इससे सुनने की क्षमता की सूक्ष्म जांच की जाती है. इस रूम में बाहरी वातावरण का बिल्कुल भी दखल नहीं रहता. इससे जांच स्पष्ट व सटीक होती है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, श्रवण बाधितों की जांच के लिए अस्पताल के प्रशासनिक ब्लॉक में ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम बनाया जाना था.

अस्पताल के ही एक रसूखदार बाबू ने अपनी ठेकेदारी के हुनर का परिचय देते हुए इस कमरे में रिनोवेशन करवा दिया. रूम में फॉलसीलिंग और कांच के गेट लगा दिए. बिना तय मापदंड के लगभग 38 हजार खर्च कर स्पीच थैरेपी रूम में बनाए गए पार्टिशन ब्लॉक में डॉक्टरों के प्रवेश के लिए जगह ही नहीं दी गई. बीच वाले ब्लॉक में दरवाजा नहीं देने से चिकित्सक भी नहीं बैठ पा रहे हैं.

इससे इन ब्लॉक का भी कोई उपयोग नहीं हो रहा है. इस रुम में सीएमएचओ विभाग की तरफ से दो कार्मिक लगे जो मूक बधिरों की जांच करते हैं. इधर, जब भुगतान का बिल एचओडी के पास पहुंचा तो उन्होंने बिल पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया. 

नौ महीने पहले बनाया था
एचओडी डॉ. शिवकुमार ने एमसीआई के नियमों का हवाला देते नया ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम के लिए अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखा था, लेकिन इसी बीच उनका तबादला हो गया. ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने मौका मिलते ही नया ब्लॉक बनाने की जगह यहां स्पीच थैरेपी रूम में पार्टटेंशन कर डॉक्टरों के बैठने के लिए तीन बड़े कांच के ब्लॉक बना दिए. 

क्या कहना है अधिकारियों का
नाक, कान-गला रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिवकुमार ने बताया कि अस्पताल प्रशासन को ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम बनाने के लिए पत्र लिखा था लेकिन यह अभी तक नहीं बना है. एमसीआई के नियमों के अनुसार, यह बेहद जरूरी होता है. ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम की जगह पर स्पीच थैरेपी रूम में डॉक्टर्स के लिए पार्टिशन कर कांच के चैंबर बना दिए. उसमें भी एक दरवाजा गलत लगा दिया. उसे ठीक करवाने के लिए कहा है. इस कारण बिलों पर हस्ताक्षर नहीं किए. अस्पताल प्रशासन ने ऑडियोमेट्री टेस्टिंग रूम के लिए नई जगह चिह्नित की है.