झुंझुनूं: ठगी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश, फर्जी डॉक्टर बन मेडिकल स्टोर वालों को देते थे धमकी

ये आरोपी मेडिकल स्टोर ओर झोला छाप चिकित्सकों को डरा कर तो, वहीं युवाओं को स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनाकर स्थाई नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करते थे.

चिकित्सा विभाग द्वारा हाल ही में स्वास्थ्य मित्र बनाने की योजना थी.

संदीप केड़िया/झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने कोरोना काल में भी ठगी का धंधा करने वाले एक फर्जी डॉक्टर समेत तीन को पकड़ा है. ये आरोपी मेडिकल स्टोर ओर झोला छाप चिकित्सकों को डरा कर तो, वहीं युवाओं को स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनाकर स्थाई नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करते थे.

यह गिरोह ना केवल झुंझुनूं, बल्कि राजस्थान के अलवर और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी सक्रिय था. झुंझुनूं सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि, कुछ दिनों पहले उनके पास सूचना आई कि, कुछ लोग मेडिकल स्टोर पर जाकर उनसे एक प्रश्नावली के तहत सवाल करते है और जवाब ना देने पर कार्रवाई होने का डर दिखाते है.

उन्होंने कहा कि, जब मेडिकल स्टोर वाला इसका रास्ता पूछता है तो, उसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनाते हैं. जिसके एवज में उससे पैसा वसूलते हैं. डॉ. गुर्जर ने कहा कि, इस सूचना के आने के बाद अपने निजी नेटवर्क को सक्रिय कर दिया. वहीं, आरोपियों से संपर्क कर 10 स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनाने का लोभ दिया.

इसमें आरोपी फंस गए और दो दिन पहले वे पचेरी खुर्द गांव पहुंचे. जहां पर वे स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनाने वाले थे कि, उन्हें पुलिस के आने की भनक लग गई और भाग गए. लेकिन ये लोग डरे नहीं. मंगलवार को ये मंड्रेला थाना इलाके के शेखपुर गांव में भी एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचकर अपनी ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले थे कि, चिड़ावा ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. संतकुमार जांगिड़ ने उन्हें जाकर दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया.

प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि, ये आरोपी स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनाने के नाम, कोविड सहायता के नाम पर और झोला छाप चिकित्सकों की जांच के नाम पर अलग-अलग तरीके से पैसे वसूलते थे.

वहीं, डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि, मौके पर जब डूमोली कलां निवासी गुरदास मान मेघवाल, जो खुद को ना केवल चिकित्सक बताता है, बल्कि एक संस्थान का चेयरमैन बताता है. उसके अलावा उसके ही रिश्तेदार सिंघाना निवासी किशनलाल तथा उनकी गाड़ी का चालक राजे कुमावत को पकड़ा और पूछताछ की गई तो, आरोपियों ने बताया कि, वे 10 दिनों से यह काम कर रहे हैं. लेकिन उनके पास अलवर के बहरोड़, हरियाणा के नारनौल और महेंद्रगढ़ के लोगों के फॉर्म और रसीदें भी मिली है. जिससे साबित होता है कि, ये लोग राजस्थान और हरियाणा में खासे सक्रिय है.

सीएमएचओ ने का कि, इनके निशाने पर केवल मेडिकल स्टोर वाले, झोला छाप चिकित्सक तथा ऐसे युवा थे, जो जीएनएम, एएनएम सहित अन्य कोर्स किए हुए है और बेरोजगार है. डॉ. गुर्जर ने संभावना जताई है कि, चिकित्सा विभाग द्वारा हाल ही में स्वास्थ्य मित्र बनाने की योजना थी. स्वास्थ्य कार्यकर्ता के नाम से स्वास्थ्य मित्र बनाने का भी झांसा आरोपी दे सकते हैं. जो पुलिस पूछताछ में सामने आएगा.

डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि, आरोपियों के पास से एक प्रश्नावली भी मिली है. जो वे अकसर अपने साथ रखते और मेडिकल स्टोर वाले के पास जाकर उस प्रश्नावली को दिखाकर उसमें लिखे सवालों का जवाब लेते थे और जब मेडिकल स्टोर वाला इन सवालों के जवाब में अटक जाता तो, उसके खिलाफ कार्रवाई करने की धमकी देते.

इसके बाद, फिर कार्रवाई से बचाने की एवज में उसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता, कोविड सहायता के नाम से पैसे वसूलते और अपना अगला टारगेट ढूंढते. इस गिरोह के सामने आने के बाद सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने सभी सीएमएचओ को अपने मुखबिर तंत्र मजबूत करने और लोगों से अपील की है कि, वे ऐसे झांसे में ना आए.

इधर, चिड़ावा ब्लॉक सीएमएचओ की रिपोर्ट पर मंड्रेला पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही, उनसे पूछताछ भी शुरू कर दी है. शुरूआती तौर पर उनके पास जो कागजात मिले हैं. वो सभी के सभी फर्जी है. उनके पास से फर्जी आईडी कार्ड, मोहर जैसी सामग्री भी मिली है. जिसकी पुलिस जांच कर रही है.