खबर का असर: नेत्रहीन लोग भी देख सकेंगे दुनिया, MBS में खुलेगा 'कॉर्निया री ट्राईवल' सेंटर

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि 'कॉर्निया री ट्राईवल' सेंटर के लिए एमबीएस अस्पताल में इमरजेंसी एक्सरे कक्ष के पास जगह चिन्हित की है. रूम रिनोवेशन का कार्य पूरा होने के बाद यहां उपकरण स्थापित होंगे. 

खबर का असर: नेत्रहीन लोग भी देख सकेंगे दुनिया, MBS में खुलेगा 'कॉर्निया री ट्राईवल' सेंटर
डॉ. सरदाना ने बताया कि कॉर्निया आर्टिफिशल नहीं बन सकता.

मुकेश सोनी, कोटा: जिले के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस में जल्द ही नेत्रदान की सुविधा शुरू होगी. जी मीडिया में खबर प्रसारित होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एमबीएस में 'कॉर्निया री ट्राईवल' सेंटर स्थापित करने की कवायद तेज कर दी है. 

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि 'कॉर्निया री ट्राईवल' सेंटर के लिए एमबीएस अस्पताल में इमरजेंसी एक्सरे कक्ष के पास जगह चिन्हित की है. रूम रिनोवेशन का कार्य पूरा होने के बाद यहां उपकरण स्थापित होंगे. जल्द ही कोटा सहित पूरे संभाग के लोगों के लिए सरकारी अस्पताल में नेत्रदान की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी.

कोटा सहित आसपास के जिलों में फिलहाल शाइन इंडिया फाउंडेशन नाम की संस्था नेत्रदान ले रही है. कोटा संभाग में 9 साल में करीब 10 हजार लोग नेत्रदान का संकल्प भर चुके हैं.

ठंडे बस्ते में थी योजना
नेत्र विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, साल 2010-11 में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से 'ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांटेंशन' संस्था में रजिस्ट्रेशन करवाया था. इस संस्था में पांच साल के लिए रजिस्ट्रेशन होता है. अवधि पूरी होने पर 5 साल बाद रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण करवाना पड़ता है. एमबीएस प्रशासन की ओर से 5 बाद रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण करवाया गया था. लेकिन योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही. अस्पताल में 'कॉर्निया री ट्राईवल' सेंटर स्थापित करने में रुचि नहीं दिखाई गई.

लंबे समय से चल रही थी कवायद
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि लंबे समय 'कॉर्निया री ट्राईवल' सेंटर को कोटा के अस्पताल में स्थापित करने को लेकर इंट्रेस्टेड थे. मेडिकल कॉलेज द्वारा एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया था. अब नए सिरे से कवायद शुरू की गई है. री ट्राईवल सेंटर के लिए अस्पताल अधीक्षक ने जगह अलॉट कर दी है. यहां का जल्द रिनोवेशन का काम करवाएंगे. सेंटर के फ्रिज व अन्य उपकरण सीएमएचओ कार्यालय से आएंगे. कॉर्निया री ट्राईवल सेंटर के लिए टेक्नीशियन व स्टाफ की पोस्टिंग हो चुकी है. उम्मीद है कि सालों पुरानी आस जल्द पूरी होगी. री ट्राईवल सेंटर शुरू होने के सरकारी अस्पताल में भी नेत्रदान हो सकेगा. यहां से कॉर्निया को जयपुर आई बैंक में भेजा जाएगा ताकि लोगों को रोशनी मिल सके.

जागरूक होकर करें नेत्रदान 
संसार की प्रत्येक वस्तु का परिचय हमारी आंखें ही तो हमें देती हैं और इस रंग-बिरंगी दुनिया का आनंद भी हम अपनी आंखों द्वारा ही उठा पाते हैं. आंखें न होने का दुख वही समझ सकता है, जिसके पास आंखें नहीं होतीं. बिना आंखों के रंगों की कल्पना भी नहीं की जा सकती. डॉ. सरदाना ने बताया कि कॉर्निया आर्टिफिशल नहीं बन सकता. ये बाजार में भी नहीं मिलता. किसी तकनीक से भी कॉर्निया को सिथेंटिकली बनाया नहीं जा सकता. इंसान का कॉर्निया इंसान के काम आता है. ये तभी संभव होगा, जब लोग जागरूक होकर नेत्रदान करेंगे. कोटा में ब्लड डोनेशन के प्रति जागरूकता अधिक है. 

कोटा में शाइन इंडिया फाउंडेशन सहित अन्य संस्थाए और कुछ लोग व्यक्तिगत स्तर पर नेत्रदान में अच्छा कार्य कर रहे हैं. सरकारी स्तर पर नेत्रदान की प्रक्रिया शुरू होने से ओर भी कई लोगो को फायदा होगा. कोटा सहित पूरे संभाग में जागरूकता बढ़ेगी, जिससे अधिक नेत्रदान हो सकेंगे.