मृत्युभोज में Corona नियमों की उड़ाई गई धज्जियां, अफीम का भी जमकर हुआ सेवन

करीब दो हजार लोग एक साथ एक ही जगह पर एकत्रित हुए. आश्चर्य की बात ये है कि लोगों में कोरोना का बिल्कुल खौफ नहीं था. किसी ने भी मास्क नहीं लगा रखा था और न ही कोई सोशल डिस्टेंसिंग थी. 

मृत्युभोज में Corona नियमों की उड़ाई गई धज्जियां, अफीम का भी जमकर हुआ सेवन
मृत्युभोज में Corona नियमों की उड़ाई गई धज्जियां.

सुभाष रोहिषवाल/उदयपुर: जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर उदयपुर मेगा हाइवे पर सोनाइमांझी में एक मृत्युभोज में न केवल कोरोना को लेकर धज्जियां उड़ाई गई बल्कि  बिना सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हजारों लोगों ने खाना खाया. बता दें कि राजस्थान सरकार ने पहले ही प्रदेश में मृत्युभोज बंद कर रखा है, लेकिन गांव के जनप्रतिनिधि व सरकारी कार्मिको आंखों पर पट्टी बांधे सब देख रहे थे. वहीं, पुलिस को सूचना देने  के डेढ़  घंटे बाद मात्र तीन जवान पहुंचे और औपचारिकता पूरी कर चले गये. यही नहीं, खेत में खाने के साथ-साथ अफीम के चटकारे भी मस्ती से लिए गए.

दरअसल, सोनाइमांझी गांव में सिरिवी समाज के एक परिवार में किसी की मौत हो गयी. समाजीक रीति-रिवाज के चलते उसके पीछे मृत्युभोज अर्थात गंगाजल का कार्यक्रम सोमवार को रखा गया. पूरा प्रोग्राम एक खेत में बने फॉर्म हाउस पर रखा गया, आसपास के गांवों से महिलाएं, पुरूष सज धजकर मृत्युभोज में पहुंचे. करीब दो हजार लोग एक साथ एक ही जगह पर एकत्रित हुए. आश्चर्य की बात ये है कि लोगों में कोरोना का बिल्कुल खौफ नहीं था. किसी ने भी मास्क नहीं लगा रखा था और न ही कोई सोशल डिस्टेंसिंग थी. डाल बाटी चूरमे के साथ लोग खाना खा रहे थे. 

एक ओर हजारों लोग खाने के चटकारे ले रहे थे तो दूसरी ओर बुजुर्ग अफीम के साथ मजे ले रहे थे. बाल्टी की बाल्टी अफीम घोला गया. लोगों में मान मनुहार के साथ पिलाया जा रहा था. वहीं, पुलिस को सूचना देने के डेढ़ घंटे बाद सदर थाने से मात्र तीन जवान लाठी लेकर पहुंचे. हजारों की संख्या में लोग और पुलिस के जवान मात्र तीन पहुंचे. फौरी कार्रवाई और औपचारिता पूरी कर वो भी निकल लिए. लेकिन खाना अंत तक चलता रहा. न खाना बंद हुआ और न पुलिस ने खाना जब्त कर लोगों और आयोजक पर कोई कार्रवाई करना मुनासिब समझा. 

बता दें कि प्रदेश में मृत्युभोज और अफीम सेवन पूर्णतया बैन है. सरकार का सीधे आदेश है कि अगर किसी गांव में कोई मृत्युभोज या सभा में अफीम सेवन हो तो, गांव के जनप्रतिनिधि और कार्यरत सरकारी कर्मचारी उसकी सूचना आलाधिकारी को देंगे अन्यथा वो खुद इसके जिम्मेदार होंगे. आश्चर्य की बात यह है कि गांव में 12वीं तक स्कूल है. अध्यापक, सरपंच, आनग्नबाड़ी, कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, पटवारी, ग्रामसेवक में से किसी ने भी जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा.