Valentine Day पर लैला-मजनू की इस मजार पर पहुंचें Couple, कभी नहीं होंगे अलग!

इस जगह पर हिंदू और मुस्लिम दोनों ही श्रद्धालु आकर सिर झुकाते हैं. यह प्रेमी आते हैं, प्यार की कसमें खाते हैं और हमेशा साथ रहने की मन्नतें मांगते हैं. 

Valentine Day पर लैला-मजनू की इस मजार पर पहुंचें Couple, कभी नहीं होंगे अलग!
लैला-मजनू की दास्तान पीढ़ियों से सुनी और सुनाई जा रही है.

कुलदीप गोयल, अनूपगढ़: लैला-मजनू, जिनके प्यार की मिसाल आज भी दी जाती है, का अंतिम स्मारक राजस्थान में स्थित है. प्रेम और धार्मिक आस्था की प्रतीक ‘लैला मजनू की मज़ार’ राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की अनूपगढ़ तहसील में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे बिंजोर गांव में स्थित है.  

यह जगह पाकिस्तान से महज़ 3 किलोमीटर दूर है. कहते हैं लैला और मजनू ने अपने प्यार में विफल होने पर यही जान दी थी. ख़ास बात यह है कि जीते-जी चाहे वो न मिल पाये लेकिन उन दोनों की मज़ारें पास-पास हैं. इस जगह पर हिंदू और मुस्लिम दोनों ही श्रद्धालु आकर सिर झुकाते हैं. यह प्रेमी आते हैं, प्यार की कसमें खाते हैं और हमेशा साथ रहने की मन्नतें मांगते हैं. वैलेंटाइन डे पर भी प्रेमी युगल पहुंचे और अपने प्यार के लिए मन्नतें मांगी.

आखिर क्या है रहस्य
मजार की कमेटी के प्रधान के अनुसार, पहले इस जगह पर कच्ची मजार हुआ करती थी और आस-पास मिल्ट्री वाले रहा करते थे. इस मजार से पहले रात के समय दो दीपक निकलते और सारी रात सरहद का चक्कर लगाकर सुबह वापिस मजार में समां जाते. मिल्ट्री वालों ने बहुत पड़ताल की लेकिन कोई भी जानकारी नहीं हासिल हुई. तब इस बिंजोर गाव के एक लंबरदार को सरहद पार के लंबरदार ने बताया कि यह लैला-मजनू की मजार है. एक बार इससे मन्नत मांग के देखो, जीवन सफल हो जाएगा. तब इस लंबरदार ने कच्ची ईंटों से जगह बना दी गई और स्थानीय ग्रामीण यहां पर आकर अपनी मन्नतें मांगने लगे. 

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गुरुवार के दिन उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
धीरे-धीरे गुरुवार के दिन यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा. फिर लोगों की आस्था इसमें बढ़ती गई और मेला लगने के बाद दीपक दिखने बंद हो गए. पहले यहां एक दिन का मेला लगता था लेकिन अब यह पांच दिन का हो गया है. उनके अनुसार यहां आने वाले हर इंसान की मन्नत पूरी होती है चाहे किसी की शादी नहीं हो रही हो या किसी के प्यार में अड़चन हो या फिर बच्चे के लिए, हर किसी की मन्नत यहां पूरी होती है. बंटवारे के बाद भी सरहद के पार से लोगों का आना-जाना यहां लगा रहता था लेकिन जैसे जैसे सरहद पर चौकसी बढ़ती गई लोगों का आना भी बंद हो गया.

निर्ममता से हुई थी मजनू की हत्या
लैला-मजनू की दास्तान पीढ़ियों से सुनी और सुनाई जा रही है. कहा जाता है कि लैला और मजनू एक दूजे से बेपनाह मोहब्बत करते थे लेकिन उन्हें जबरन जुदा कर दिया गया था. लैला मजनू की मौत यहीं हुई थी यह तो सब मानते हैं पर लैला-मजनू की मौत कैसे हुई, इसके बारे में कई मत हैं. कुछ लोगों का मानना है कि लैला के भाई को जब दोनों के इश्क का पता चला तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और आखिर उसने निर्ममता से मजनू की हत्या कर दी. लैला को जब इस बात का पता चला तो वह मजनू के शव के पास पहुंची और वहीं उसने खुदकुशी करके अपनी जान दे दी. यहां के लोग इस मजार को लैला-मजनू की मजार कहते हैं. 

मजार पर चादर चढ़ाने आए एक दंपति ने बताया कि वे पिछले साल शादी की मन्नत मांग कर गए थे और अब उनकी शादी हो गई और अब वे ख़ुशी ख़ुशी दुबारा यहां मत्था टेकने आए हैं.

हर तरह की इच्छा होती है पूरी
इसी तरह बहुत से लोग आए, जिनमें से कोई अपनी शादी के लिए, कोई शादी के बाद, कोई अपने बच्चे की शादी के लिए और कोई बच्चा होने की मन्नत मांगने आया. लोगों का कहना था कि जब वे लोग दूसरों लोगों से सुनते हैं कि उनकी मन्नत पूरी हो गई तो उनका विश्वास और मजबूत हो जाता है. लैला-मजनू को अलग करने की लाख कोशिशें की गईं लेकिन सब बेकार साबित हुईं. उनकी मौत के बाद दुनिया ने जाना कि दोनों की मोहब्बत कितनी अजीज थी?  लैला-मजनू की मोहब्बत जिंदा है और जब तक दुनिया है जिंदा रहेगी.