कोटा में कोविड अस्पताल में बेड हुए फुल, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की फूली 'सांसें'

अब जिला प्रशासन ने भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, होम आइसोलेशन/क्वारंटाईन करने का निर्णय लिया है. इसके लिए मरीज को 12 तरह की शर्तों का पालन करना जरूरी है.  

कोटा में कोविड अस्पताल में बेड हुए फुल, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की फूली 'सांसें'
अब अस्पताल प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं.

मुकेश सोनी/कोटा: राजस्थान के कोटा में कोराना पॉजिटिव मरीजों से कोविड अस्पताल भर गया है. हालात यह है कि, अस्पताल में 235 के करीब पॉजिटिव मरीज भर्ती हैं. अस्पताल प्रशासन के पास जगह की कमी आ गई है. ऐसे में जिले में बढ़ते कोरोना के कहर से देखते हुए, मेडिकल कॉलेज प्रशासन के हाथ पांव फूलते नजर आ रहे हैं और अब अस्पताल प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं.

वहीं, जिला प्रशासन द्वारा बहुत हल्के/प्री-सिम्पटोमेटिक (कम लक्षण वाले) मरीजों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, होम आइसोलेशन/क्वारंटाईन करने का निर्णय लिया है. इसके लिए मरीज को 12 तरह की शर्तों का पालन करना जरूरी है.

दरअसल, पहले कोविड डेडिकेटेड अस्पताल के तहत सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक व नए अस्पताल में मरीजों को भर्ती किया जाता था. लेकिन सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक का दोबारा उद्घाटन के चलते, उसे आनन-फानन में उसे खाली करवा दिया गया और नए अस्पताल में बिना तैयारी के मरीजों को शिफ्ट किया गया.

अस्पताल अधीक्षक डॉ सीएस सुशील ने बताया कि, वर्तमान में यहां डायलिसिस हो रहा है. साथ में, कार्डियोलॉजी वार्ड भी चालू है. जिस कारण 200 से 250 बेड ब्लॉक हो गए हैं. जबकि, 3 वार्डो में टॉयलेट सही नहीं हुए हैं. अस्पताल में फिलहाल 203 से 205 मरीज भर्ती करने की व्यवस्था हैं. मरीजों की संख्या बढ़ने से दिक्कतें आ रही हैं.

जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज प्रशासन व चिकित्सा विभाग ने संयुक्त रुप से मिलकर नई गाइडलाइन के अनुसार, पिछले महीने से 24 घंटे हेल्थ वर्कर लगाकर घर पर ही, अलग से जगह होने पर मरीजों को क्वारंटाइन कर इलाज की सुविधा मुहैया करवाई जा रही थी.

वहीं, शहर में करीब 25 जगहों पर लोगों को होम क्वारंटाइन कर, कोविड का इलाज किया जा रहा था, लेकिन दोनों विभाग की ओर से बीते तीन दिन से यह सुविधा बंद कर दी गई है. इससे किसी भी नए मरीज को घर पर होम आइसोलेट नहीं किया गया. पुराने मरीजों को भी अस्पताल में भर्ती होने के लिए बोल दिया गया है.

चिकित्सा विभाग व मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सामने मरीजों के घर-घर जाकर इलाज करने की समस्या खड़ी हो गई. चिकित्सा विभाग ने अलग से टीमें नहीं होने का हवाला देकर, हाथ खड़े कर दिए हैं. उन्होंने मेडिकल कॉलेज से 25 रेजिडेंट की मांग की, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने देने से मना कर दिया है,

इधर, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने चिकित्सकों की कमी का हवाला देते हुए मना कर दिया है. जबकि, कोराना मरीजो की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सयुंक्त निदेशक चिकित्सा एंव स्वास्थ्य सेवाएं जोन कोटा से मदद की गुहार लगाई है.

सयुंक्त निदेशक चिकित्सा एंव स्वास्थ्य सेवाएं जोन कोटा ने भी सीएमएचओ कोटा को पत्र भेजकर कोविड-19 केयर सेंटर शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं. मामला जिला कलेक्टर के पास पहुंचा. इसके बाद, कलेक्टर ने चिकित्सा विभाग व मेडिकल कॉलेज प्रशासन के साथ बैठक की.  बैठक में बहुत हल्के/प्री-सिम्पटोमेटिक (कम लक्षण वाले) मरीजों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार, होम आइसोलेशन/क्वारंटाइन करने का निर्णय लिया गया है.

हालांकि, लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान राज्य सरकार ने कोटा में 7 हजार बेड रिजर्व रखने के निर्देश जारी किए थे. निर्देश के बाद कोटा एमबीएस, नए अस्पताल ,सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक सहित कुछ निजी अस्पतालों में बेड रिजर्व किए थे. वहीं, कोविड -19 मरीजो को क्वारंटाइन के लिए आलनिया स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी में 500 बेड रिजर्व किए थे. मरीज बढ़ने के साथ ही, विभाग के यह दांवे फेल होते नजर आ रहे हैं. 200 से ऊपर एक्टिव मरीज होने पर आलाधिकारियों की सांसे फूलने लगी हैं.