COVID19: भीलवाड़ा बना नजीर, जयपुर करता फॉलो तो नहीं आती यह नौबत

 यहां सबसे संवेदनशील इलाका चारदीवारी और विशेषकर रामगंज है. यहां की कुल आबादी लगभग 8 लाख है, लेकिन स्क्रीनिंग का काम अब तक केवल 150 टीमों से ही करवाया गया.

COVID19: भीलवाड़ा बना नजीर, जयपुर करता फॉलो तो नहीं आती यह नौबत
जयपुर जिले में 900 टीमें स्क्रीनिंग के लिए लगाई है.

जयपुर: कोरोना के बढ़ते मामलों को नियंत्रण में लाने के लिए केन्द्र सरकार पूरे देश में भीलवाड़ा मॉडल को लागू करने की तैयारी कर रही हो. लेकिन इस मॉडल को जयपुर फॉलो करता तो शायद यह नौबत नहीं आती. इसी का परिणाम है कि जयपुर के रामगंज में पॉजिटिव मामलें इतनी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. बता दें कि, जयपुर में अब तक 92 मामले पॉजिटिव आ चुके हैं.

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कोरोना के लगातार मरीज सामने आने के बाद स्थिति बिगड़ती हुई दिखी तो वहां जिला प्रशासन ने सभी विभागों के साथ समन्वय कर स्थिति को संभाल लिया. जो कि आज पूरे देश मे नजीर बन गया है. राजधानी जयपुर में देखें तो अब स्थिति उलट है. सरकार और संसाधान के बाद भी राजधानी में 92 लोग को संक्रमित हो गए. 

इस बीच प्रशासन, पुलिस और चिकित्सा विभाग की सभी तैयारियां धरी रह गई. अधूरी तैयारियों के साथ फील्ड में उतरा प्रशासन इससे सवालों के घेरे में आ गया है. यहां प्रशासन, चिकित्सा विभाग और पुलिस का तालमेल नहीं होने के कारण बढ़ने लगे परकोटे में कोरोना पॉजिटिव की संख्या में इजाफा होता गया. यहां सबसे संवेदनशील इलाका चारदीवारी और विशेषकर रामगंज है. यहां की कुल आबादी लगभग 8 लाख है, लेकिन स्क्रीनिंग का काम अब तक केवल 150 टीमों से ही करवाया गया. मामले बढ़ने लगे और स्थिति भयावय होने लगी तो जयपुर कलक्टर के निर्देश देकर स्क्रनिंग के लिए अतिरिक्त 100 और टीमें लगवाई. 

जिला कलेक्टर डॉक्टर जोगाराम ने बताया कि पूरे जयपुर जिले की बात करें तो यहां 900 टीमें स्क्रीनिंग के लिए लगाई है. अब तक 22 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है. वहीं, 1819 लोग जो होम क्वारैन्टाइन और 457 जो इंस्टीटयूशन क्वारैन्टाइन है उनकी स्क्रीनिंग के बाद निगरानी की जा रही है. 

आपको बताते है कि एक समय भीलवाड़ा कोरोना का एपिसेंटर बना हुआ था. पिछले माह 30 मार्च तक राज्य में संक्रमण के सबसे ज्यादा 26 मामले भी यहीं पर थे, लेकिन वहां स्थानीय प्रशासन ने जिस कदर सख्ती दिखाई और जिस तेजी से वहां के लोगों की स्क्रीनिंग की उसी का परिणाम निकला कि आज वहां मामले आज दिन तक केवल 27 ही पहुंचे है. इसके चलते अब यहां के हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं. 

हालांकि, खतरा अभी कम नहीं हुआ है, जिसके चलते प्रशासन ने 13 अप्रैल तक महा कर्फ्यू लगा दिया है. इसके लिए शहर की सभी गलियों और कालोनियों की बैरिकेडिंग की गई है. स्थिति यह है कि लोग एक गली से दूसरी गली में भी नहीं जा सक रहे. वहीं, दूसरी तरफ जयपुर के रामगंज क्षेत्र की बात करें तो यहां मामला संभलने के बजाए बिगड़ता जा रहा है. यही कारण है कि यहां पिछले एक सप्ताह के अंदर 63 से ज्यादा मामले सामने आ गए और अब संक्रमितों का आंकड़ा 92 तक पहुंच गया. 

जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा में 20 मार्च को संक्रमण का पहला केस डॉक्टर में मिला था. अगले दिन उसी अस्पताल के तीन डॉक्टर और स्टाफ में संक्रमण की पुष्टि हुई थी. इसके बाद पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया. पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया. इसमें रोडवेज बस से लेकर ऑटो-रिक्शा, टैक्सी सभी शामिल थी. शहर में संक्रमण की चेन को तोडऩे के लिए 77 हजार घरों का तीन बार सर्वे करवाया. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक-एक घर में जाकर लोगों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की. 

इस पूरे कार्य में पहले चरण में 6 हजार टीमों ने 24 लाख लोगों की स्क्रीनिंग 9 दिनों में पूरी की. जबकि दूसरे चरण में 18 हजार लोगों का सर्वे के साथ ही सर्दी-जुखाम का इलाज किया. कोरोना संदिग्धों को भीलवाड़ा के थ्री स्टार होटल और रिजॉर्ट तक में रखा गया. कई जगह तो हर कमरे के लिए अलग गार्डन भी है. 

वहीं, घर में क्वारेंटाइन 6445 लोगों की ऐप से निगरानी की गई. शहर में 13 अप्रैल तक महा कर्फ्यू लगाया गया. इसमें सिर्फ बेहद जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों एवं वाहनों को ही निकलने की अनुमति. इसके लिए पहले से बने उनके पास मान्य. बाकी कफ्र्यू के दौरान जारी किए सभी पास को निरस्त कर दिया. यहां तक मीडिया को भी बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी है.

बहरहाल, परकोटा इलाके में लॉकडाउन और कर्फ्यू की पालना पूरी तरह से नहीं हो पाई. प्रशासन की ओर से राशन और अन्य सामग्री की व्यवस्था ठीक तरह से नहीं की गई. ऐसे में लोग घरों से बाहर निकल गए. लॉकडाउन की पालना नहीं हुई. इतना ही नहीं सोशल डिस्टेंसिंग भी यहां बरकरार रखने में प्रशासन फेल रहा. परकोटे में आज भी कई ऐसे घर या आवास जहां 30 से 40 लोग यानी 7-8 परिवार एक साथ रहते हैं. ऐसे में यहां सोशल डिस्टेसिंग की पालना नहीं हो पा रही है. जिसके कारण यहां संक्रमण का खतरा बढ़ गया.