1992 के बाद पहली बार विधानसभा स्पीकर के नोटिस को कोर्ट में मिली चुनौती: CP जोशी

सीपी जोशी ने ज़ी मीडिया से खास बातचीत में कहा कि देश में कई संवैधानिक अथॉरिटी हैं. विधानसभा स्पीकर भी उनमें से एक है. 

1992 के बाद पहली बार विधानसभा स्पीकर के नोटिस को कोर्ट में मिली चुनौती: CP जोशी
जोशी ने कहा कि एक अथॉरिटी और दूसरी अथॉरिटी के बीच संविधान में जो भूमिका है, उसमें न्याय होना चाहिए.

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने ज़ी मीडिया से खास बातचीत में कहा कि देश में कई संवैधानिक अथॉरिटी हैं. विधानसभा स्पीकर भी उनमें से एक है. 

सुप्रीम कोर्ट ने साल 1992 में दलबदलू को अयोग्य करार देने के लिए विधानसभा स्पीकर को अधिकृत किया था, लेकिन 1992 के बाद आज पहली बार ऐसा हुआ है, अध्यक्ष की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी करने करने पर ही उसे कोर्ट में चुनौती दी गई. 

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सीपी जोशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हमारी एसएलपी पेश की गई है, उस बारे में जो भी निर्णय होगा, उसे स्वीकार करेंगे. कोर्ट की सुनवाई पर सीपी जोशी बोले कि कोर्ट में क्या चल रहा है, उसमें मैं नहीं जाना चाहता, लेकिन मैं बस यह चाहता हूं कि अध्यक्ष पद की गरिमा बनी रहे. उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं, लेकिन अगर संवैधानिक अथॉरिटी के कामों में हस्तक्षेप होगा तो इससे लोकतंत्र पर संकट खड़ा हो जाएगा. विधानसभा अध्यक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दायरे में काम करता है, विधानसभा के अपने नियम कायदे होते हैं, उन्हीं के अनुरूप विधानसभा अध्यक्ष कार्रवाई करता है. 

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अगर विधानसभा अध्यक्ष और कोर्ट के बीच समन्वय नहीं रहेगा तो यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. इसके लिए विधानसभा में नियम प्रक्रियाएं बनी हुई है लेकिन अगर कोई इस तरह से अध्यक्ष के नोटिस को ही कोर्ट में चुनौती देगा तो यह सही नहीं है. जोशी ने कहा कि एक अथॉरिटी और दूसरी अथॉरिटी के बीच संविधान में जो भूमिका है उसमें न्याय होना चाहिए.