बाड़मेर कस्टडी में मौत मामले में सीपी जोशी ने की पुलिस पर गम्भीर टिप्पणी, कहा..

धारीवाल के बयान पर स्पीकर ने पूछा कि क्या सरकार पुलिस को इतना सज्जन मानती है कि पुलिस किसी को उठाकर लाने के बाद रातभर थाने में रखे और कुछ भी नहीं करे. 

बाड़मेर कस्टडी में मौत मामले में सीपी जोशी ने की पुलिस पर गम्भीर टिप्पणी, कहा..
सीपी जोशी ने पुलिस पर गम्भीर टिप्पणी की.

जयपुर: स्पीकर सीपी जोशी ने बाड़मेर कस्टडी में मौत के मामले में चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मन्त्री शांति धारीवाल की भी खिंचाई की. धारीवाल के बयान पर स्पीकर ने पूछा कि क्या सरकार पुलिस को इतना सज्जन मानती है कि पुलिस किसी को उठाकर लाने के बाद रातभर थाने में रखे और कुछ भी नहीं करे. स्पीकर ने यह भी पूछा कि अगर यह कस्टडी में मौत नहीं थी तो सरकार ने एसपी, एसएचओ और थाने पर कार्रवाई क्यों की?

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को बीजेपी विधायकों ने भले ही बाड़मेर में पुलिस हिरासत में मौत के मामले में हंगामा किया हो लेकिन इस मामले में सरकार की खिंचाई में स्पीकर सीपी जोशी ने भी कमी नहीं छोड़ी. दरअसल, हंगामे के बाद बाड़मेर के मामले पर दोबारा चर्चा शुरू हुई तो स्पीकर डॉक्टर सीपी जोशई ने कहा कि सदन इस मामले की गम्भीरता को समझे. उन्होंने कहा कि मूल प्रश्न यह है कि बिना एफआईआर किसी को पुलिस ने उठाया और उसके बाद हिरासत में मौत होने पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए या नहीं? उन्होंने कहा कि 50 साल बाद भी नियम नहीं बदले तो जनता के बीच मैसेज नहीं जाता है. यह सीधे-सीधे नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है.

इसके बाद मंत्री शांती धारीवाल ने वक्तव्य देने के दौरान फिर से केस के बारे में बोलना शुरू किया तो स्पीकर ने उन्हें टोक दिया. इस पर धारीवाल ने माना कि मामले में जितेन्द्र खटीक को उठाने से पहले एफआईआर नहीं हुई थी. उन्होंने माना कि जितेन्द्र को 26 फरवरी को थाने लाए थे. रात भर वहां रखा गया उसके बाद अगले दिन गुरूवार को दोपहर डेढ़ बजे उसने सीने में दर्द की शिकायत की. लेकिन साथ ही मन्त्री शान्ति धारीवाल ने कहा कि मृतक पुलिस पिटाई से मरा है या किसी और कारण से यह पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में साफ हो जाएगा. लिहाजा रिपोर्ट का इन्तज़ार करना चाहिए.

धारीवाल के इस रवैये पर सीपी जोशी ने एक बार फिर दखल दिया. उन्होंने पुलिस पर गम्भीर टिप्पणी करते हुए मन्त्री से पूछा कि क्या पुलिस इतनी सज्जन है कि किसी को रात भर थाने में बिठाकर रखें और कुछ भी नहीं करे? जोशी ने धारीवाल से कहा कि कस्टोडियल डेथ पर कोई प्रावधान नही हैं, लिहाजा आप चर्चा को उस मुद्दे तक ही सीमित रखें. जोशी ने धारीवाल से कहा कि थानेदार या पुलिस के आदमी उसे शक के आधार पर ले आये और पुलिस वालों ने खुद ही यह मान लिया कि चोरी उसी ने की है. उन्होंने कहा कि इस तरह के वक्तव्य ठीक नहीं हैं.

इस पर धारीवाल ने कहा कि सीजेएम ने मजिस्ट्रेट इंक्वाइरी के निर्देश दिए हैं. इस पर फिर स्पीकर डॉक्टर सीपी जोशी फिर नाराज हो गये और धारीवाल को लताडते हुए कहा कि जो बाते आप बोल रहे हैं यह सब तो होता है, उसमें नहीं जाना चाहिए. स्पीकर ने कहा कि जब सरकार ने स्वमोटो निर्णय लेते हुए एसपी को एपीओं और थाने को लाइन हाजिर किया है. इसका मतलब सरकार ने खुद ही यह मान लिया है कि पुलिस की गलती है. अब इस पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है.

इस पर धारीवाल ने कहा कि वो चाहते हैं कि यह तो पता लगे कि वह हार्ट अटैक से मरा या मारपीट से उसकी मौत हुई? इस पर अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि फिर सरकार ने पुलिस अधिकारियों को सस्पेन्ड क्यों किया? तो शांति धारीवाल ने कहा पुलिस पर कार्रवाई इसलिए की गयी क्योंकि बिना एफआईआर के उसने युवक को थाने में रखा.