बूंदी उत्सव का शानदार आगाज, रजत जयंती पर गुलजार हुईं वीरान हवेलियां

इस उत्सव पर पूरे दिन कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें रस्सा-कस्सी, साफा बंधन, घोड़ा दौड़, ऊंट दौड, पणिहारी दौड़ आदि प्रतियोगिताएं शामिल हैं.  

 बूंदी उत्सव का शानदार आगाज, रजत जयंती पर गुलजार हुईं वीरान हवेलियां
यह महोत्सव प्रेम एवं भाईचारे का रूप ले चुका है.

संदीप व्यास, बूंदी: हाड़ौती के इंद्रधनुषी सांस्कृतिक आयोजन ‘बूंदी उत्सव’ का आज रजत जयंती महोत्‍सव मनाया गया. इसका शुभारंभ गढ़ पैलेस परिसर में  शंखनाद संग गणेश पूजन, ध्वजारोहण एवं अतिथि सत्कार किया गया. 
उत्सव के कार्यक्रमों की श्रृखंला में गढ़ पैलेस से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो शहर के मुख्‍य बाजारों से होती हुई पुलिस परेड ग्राउण्ड पर संपन्न होगी. यहां रस्सा-कस्सी, साफा बंधन, घोड़ा दौड़, ऊंट दौड़, पणिहारी दौड़ आदि प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी.

जिला कलेक्टर रुक्मणि रियार सिहाग ने कहा कि लोग बूंदी उत्सव के रजत जयंती वर्ष के आयोजनों में अपनी पूरी भागीदारी निभाएं. सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और सभी कार्यक्रमों को भव्यता प्रदान करें. जिला कलेक्टर ने बताया कि बूंदी उत्सव के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इस बार उत्सव को नया रूप दिया गया है. कई नए श्रेष्ठ कार्यक्रम शामिल किए गए हैं, जिससे इस उत्सव की गरिमा और सौंदर्य में वृद्धि होगी. आमजन की इसमें भागीदारी ही इस आयोजन को और ऊंचाइयां प्रदान करेगी.

वीरान हवेलियों में चहल-पहल शुरू हो गई
वरिष्ठ साहित्यकार कवि पियूष पाचक ने कहा कि वर्ष 1996 में तत्कालीन कलेक्टर मधुकर गुप्ता की पहल पर इस बूंदी उत्सव का आयोजन का शुभारंभ किया गया था, तभी से आज के दिन यह परंपरा बूंदी उत्सव के रूप में निभाई जा रही है. 

पर्यटकों को आकर्षित करने वाला बूंदी उत्सव लगातार अपने पूरे यौवन पर है और इसी परंपरा के चलते ही शहर में जो वीरान हवेलियां थीं, उनमें अब चहल-पहल शुरू हो गई है. धीरे-धीरे पर्यटन उद्योग शुरू हुआ है. पिछले 10 वर्ष से पर्यटन विभाग ने अपने कैलेंडर में लेकर उत्सव में अपना योगदान दे रहा है. वहीं बजट के अभाव में हालांकि अभी कुछ कमियां भी हैं. बूंदी उत्सव पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है.

सपने जैसी है बूंदी नगरी
वरिष्ठ साहित्यकार राजकुमार दाधीच ने कहा कि पर्यटकों के लिए बूंदी नगरी एक सपने जैसी है. यहां की पौराणिक धरोहर को देखने के बाद पर्यटक काफी उत्साहित नजर आता है. यहां की चित्रकारी पुराने महलों को देख पर्यटक काफी प्रसन्न नजर आते हैं. 

प्रेम और भाईचारे की मिसाल है ये उत्सव
काजी काउंसिल प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल शकूर कादरी ने कहा कि यह महोत्सव प्रेम एवं भाईचारे का रूप ले चुका है. हमें विदेशी पर्यटकों को लाने के लिए यहां पर प्रेम एवं भाईचारा दिखाने की जरूरत है. आज शहर में हम हर कोने को साफ रखें और उसी के तहत इन पर्यटन स्थलों की देखभाल करें तो आने वाले दिनों में यहां का माहौल बदल जाएगा. यह उत्सव प्रेम एवं भाईचारे के रूप में मनाया जा रहा है, जो काफी सराहनीय है. उत्‍सव की शुरुआत जिस रूप से की गई थी, आज उसमें चार चांद लग गए हैं. काफी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है.

गौरतलब है कि इस उत्सव पर पूरे दिन कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें रस्सा-कस्सी, साफा बंधन, घोड़ा दौड़, ऊंट दौड, पणिहारी दौड़ आदि प्रतियोगिताएं शामिल हैं.