पाकिस्तान की वजह से भारत में महंगा होगा 'जीरा', किसानों-व्यापारियों को बड़ा नुकसान

राजस्थान में फसल पर पाकिस्तान से आये टिड्डी दलों का हमला किसानों पर भारी पड़ रहा है.  

पाकिस्तान की वजह से भारत में महंगा होगा 'जीरा', किसानों-व्यापारियों को बड़ा नुकसान
फाइल फोटो

अंकित तिवाड़ी, जयपुर: राजस्थान में फसल पर पाकिस्तान (Pakistan) से आये टिड्डी दलों का हमला किसानों पर भारी पड़ रहा है. सरहदी जिलों खासकर जैसलमेर, जोधपुर और बाड़मेर में फसल टिड्डियों के आतंक की शिकार हुई है. नागौर, भीनमाल सहित कुछ क्षेत्रों में मौसम की मार से फसल पहले ही खराब हो चुकी है. ऐसे में आने वाले दिनों में जीरा कीमतों में तेजी की संभावना है. वहीं चालू सीजन के दलहन और तिलहन की दरों में भी इजाफा संभावित है.

सरहदी जिलों पर असर
राजस्थान में पाकिस्तान से आए टिड्डियों के दल ने किसानों की आंखों के आगे अंधेरा किया हुआ है. मेहनत से बोई गई फसलें टिड्डियों के हवाले हैं, किसानों के पसीने की कमाई उनकी आंखों में पानी बनकर बह रही है. कृषि विभाग के अधिकारियों की सुस्ती भारी पड़ रही है. 

मसालों के लिए प्रसिद्ध राजस्थान में टिड्डियों ने कमाई के दरवाजे बंद कर दिए हैं. कृषि विभाग ने खराब फसल के आंकड़े अभी जमीन पर जाकर नहीं लिए हैं, जो फीड लिया गया है उसे अभी सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है. 

देशभर का 35 फीसदी जीरा राजस्थान में पैदा होता है. इस बार स्टॉक बेहद कम है. ऐसे में कीमतों पहले से तेजी पर है. मंडियों में जीरा 1500 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है. पिछले सीजन के मुकाबले कीमतों में 200 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा है. अगर इस सीजन में भी फसल प्रभावित होती है तो कीमतों में तेजी तय है. 

200 करोड़ की फसल पर साया
मौटे तौर पर अगर माने तो 200 करोड़ रुपए की जीरे की फसल पर इस समय टिड्डियों का साया है. तीन जिलों में फसलें खराब हो चुकी हैं. पड़ौसी राज्य गुजरात में भी जीरे की फसल पर टिड्डी आंतक है. मंडियों में भी बड़े कारोबारियों के पास इस समय स्टॉक सीमित है. जीरे के निर्यात कारोबार की अनुमति पर स्थानीय बाजारों में कमी संभव है.

मुनाफे पर असर 
मंडी कारोबारियों का भी कहना है कि जीरे समेत सीजनेबल फसलों को टिड्डियों से बचाने की पहल नहीं हुई तो नुकसान किसानों के साथ-साथ कारोबारियों के मुनाफे का भी होगा. राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अण्यक्ष बाबुलाल गुप्ता का कहना है कि पांच से दस फीसदी फसल अभी खराबे की शिकार हो चुकी है, टिड्डियों के अंडों से निकलने वाले बच्चों का भी असर फसल पकने तक रहेगा. अगर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो जीरे की पैदावार प्रभावित होगी, जिसका असर कीमतों पर पड़ना तय है.

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