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Dausa News: दौसा जिला मुख्यालय के पंडित नवल किशोर शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीबीए (BBA) कोर्स में छात्रों की रुचि कम होती जा रही है. इस साल 60 सीटों के मुकाबले सिर्फ दो छात्रों ने ही आवेदन किया है, जिससे कक्षाएं शुरू करना संभव नहीं हो पा रहा है.
क्यों नहीं मिल रहे छात्र?
कॉलेज के प्राचार्य लालाराम मीणा ने इस स्थिति के पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए हैं.
ग्रामीण परिवेश और अंग्रेजी माध्यम: दौसा एक ग्रामीण क्षेत्र है और यहाँ के छात्र हिंदी माध्यम में पढ़ाई करना पसंद करते हैं. बी.बी.ए. कोर्स पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाया जाता है, जो छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
कठिन पासिंग मानदंड: इस कोर्स में पास होने के लिए 48% अंक लाना जरूरी है, जबकि अन्य पाठ्यक्रमों में यह मानदंड कम होता है. यह भी छात्रों को हतोत्साहित करता है.
एमबीए में कोई अतिरिक्त लाभ नहीं: छात्रों को लगता है कि बी.बी.ए. कोर्स करने के बाद उन्हें एमबीए (MBA) में प्रवेश के लिए कोई खास फायदा नहीं मिलता है, जबकि बीकॉम (B.Com) करने वाले छात्र भी आसानी से एमबीए में प्रवेश ले सकते हैं.
पिछला साल भी रहा निराशाजनक
यह समस्या केवल इस साल की नहीं है. प्राचार्य मीणा ने बताया कि पिछले साल जब यह कोर्स शुरू हुआ था, तब भी केवल एक दर्जन छात्रों ने ही आवेदन किया था. इस साल आवेदकों की संख्या घटकर सिर्फ दो रह गई है, जिससे इन दोनों छात्रों ने भी अब बीकॉम में प्रवेश ले लिया है. कॉलेज प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि निर्धारित 15% छात्रों की संख्या पूरी न होने पर कक्षाओं को शुरू नहीं किया जा सकता है. यह दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बी.बी.ए. जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों को लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है.
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