दौसा की श्यालावास सेंट्रल जेल बन रही उद्योग केंद्र, कैदी अब बना रहे फर्नीचर-कंबल और मिट्टी के कुल्हड़

Shyalaawas Central Jail: दौसा जिले के श्यालावास में स्थित केंद्रीय विशिष्ट कारागृह कभी फोन से सीएम को जान से मारने की धमकियों को लेकर सुर्खियों में रही. अब जेल के बंदी रचनात्मक काम कर रहे हैं.

दौसा की श्यालावास सेंट्रल जेल बन रही उद्योग केंद्र, कैदी अब बना रहे फर्नीचर-कंबल और मिट्टी के कुल्हड़
Image Credit: Shyalaawas Central Jail

Shyalaawas Central Jail: राजस्थान के दौसा जिले के श्यालावास में स्थित केंद्रीय विशिष्ट कारागृह कभी फोन से सीएम को जान से मारने की धमकियों को लेकर सुर्खियों में रही. अब जेल के बंदी रचनात्मक काम कर रहे हैं. जेल में बंदी अब एक से एक बेहतरीन उत्पाद बना रहे हैं, जिनमें कंबल, लकड़ी के फर्नीचर, स्टील फर्नीचर, कार्पेट, मिट्टी के कुल्हड़, कलाकृति सहित अन्य वस्तुएं तैयार कर रहे हैं.

अगर सब कुछ सही चलता रहा तो आने वाले दिनों में जेल जेल नहीं बल्कि एक उद्योग केंद्र बन जाएगा. इसके माध्यम से कैदियों को जेल में रहकर काम करने की एवज में आय होती रहेगी. 165 बीघा जमीन में बनी एक हजार बंदियों की क्षमता वाली श्यालावास जेल में फिलहाल करीब 700 बंदी सजा काट रहे हैं.

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जेल में रहते हुए बंदी काम कर आय कर सके. इसके लिए जेल प्रशासन द्वारा पहले बंदियों को कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण दिया गया. उसके बाद यहां शुरू हुआ लघु उद्योग का काम अब श्यालावास जेल के बंदी कई अन्य फर्मों के कांटेक्ट से एक से एक बेहतरीन उत्पाद बना रहे हैं, जिनमें लकड़ी के फर्नीचर, स्टील फर्नीचर, ऊनी कम्बल, मिट्टी के कुल्हड़ कार्पेट, दरी, कलाकृतियां सहित कई वस्तुएं बनाई जा रही हैं.

साथ ही खेती का भी यहां काम किया जा रहा है. जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया जेल में रहकर भी बंदी आय कर सके. इसके लिए यह काम शुरू किया गया है. पीपीपी मॉडल पर कई फर्मों से कांटेक्ट कर इस काम को यहां शुरू किया गया है और मांग के अनुरूप माल तैयार कर सप्लाई किया जाता है, ताकि बंदियों को जेल में भी नियमित आय होती रहे.

साथ ही उनकी आपराधिक प्रवृत्ति में बदलाव होकर वह भी एक सामाजिक जीवन जी सके. जेल अधीक्षक ने कहा कि फिलहाल जेल में जय कम छोटे स्तर पर किया जा रहा है और आने वाले समय में मांग के अनुरूप इस काम को बढ़ाया भी जा सकता है. राजस्थान सरकार के 2 साल के कार्यकाल के पूर्ण होने पर जेल प्रशासन द्वारा जेल में बंदियों द्वारा बनाए जा रहे.

उत्पादों की कलेक्ट्रेट परिसर में सूचना केंद्र के सामने प्रदर्शनी भी लगाई, ताकि आम लोगों को जेल में बने उत्पादों की जानकारी मिले और वह भी जेल में बने उत्पाद खरीदेंगे, तो बंदियों की आय में भी इजाफा होगा और सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा, तो आने वाले दिनों में जेल-जेल नहीं, बल्कि एक बड़ा अलग-अलग उद्योगों का केंद्र भी बन सकता है.

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Aman Singh

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