&w=896&h=504&format=webp&quality=medium)
Dausa News: दौसा जिले में स्थित विश्व विख्यात आभानेरी की चांद बावड़ी इतिहास के कई रहस्य समेटे हुए हैं. आठवीं, नवी शताब्दी के बीच बनी यह बावड़ी स्थापत्य कला और वास्तु कला का बेजोड़ नमूना है. आज इस बावड़ी की ख्याति इतनी है कि देश के नहीं दुनिया भर के विदेशी सैलानी भी इसे देखने आते हैं. साथ ही उस दौर में बनी यहां की कलाकृतियां हर किसी को हैरान करती हैं. भले ही इस बावड़ी को उस समय के शासक द्वारा जल संरक्षण के लिए बनाया हो, लेकिन इस बावड़ी गुप्त सुरंग के साथ कई किवदंतियां भी जुड़ी हुई है.
पर्यटन बूम का असर इन दिनों राजस्थान में साफ़ तौर पर देखने को मिल रहा है. विश्व प्रसिद्ध चांद बावड़ी एक बार फिर देश-विदेश के सैलानियों से गुलजार है. आठवीं सदी की यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला के चलते पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. प्रदेश में पर्यटन सीजन चरम पर है. दौसा जिले के आभानेरी स्थित विश्व प्रसिद्ध चांद बावड़ी पर सैलानी उमड़ रहे हैं. बांदीकुई से करीब पांच किलोमीटर दूर बसे इस ऐतिहासिक गांव में रोज़ाना देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते है.
आठवीं शताब्दी में गुर्जर प्रतिहार राजा चांद ने इसका निर्माण करवाया. यह बावड़ी दुनिया की सबसे गहरी बावड़ियों में शुमार है. करीब 35 मीटर चौड़ी और सौ फीट से अधिक गहरी इस तेरह मंजिला बावड़ी में भूलभुलैया की तरह बनी लगभग 3500 सीढ़ियां हैं, जो इसे स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना बनाती हैं.
चांद बावड़ी को अंधेरे और उजाले की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है. खास बात यह है कि चांदनी रात में यह बावड़ी दूधिया सफेद रंग में नहाई हुई दिखाई देती है. स्तंभयुक्त बरामदों से घिरी यह वर्गाकार बावड़ी अपनी सबसे निचली मंजिल पर महिषासुर मर्दिनी और भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाओं को संजोए हुए है. चांद बावड़ी के समीप ही स्थित है हर्षद माता का प्राचीन मंदिर. हर्ष, उल्लास और खुशी की देवी के रूप में पूजी जाने वाली हर्षद माता के इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. महामेरू शैली में निर्मित इस मंदिर के गर्भगृह और मंडप गुम्मदाकार हैं.
लोगों की मानें तो बावड़ी में सुरंगनुमा गुफाएं भी हैं. जिनकी लंबाई करीब 17 किलोमीटर बताई जाती है, जो भांडारेज गांव तक जाती थीं. युद्धकाल में राजा और सैनिक इन सुरंगों का उपयोग सुरक्षा के लिए करते थे. लोककथाओं के अनुसार, इस बावड़ी का निर्माण एक ही रात में किया गया था चांद बावड़ी से निकलती गुप्त सुरंग को लेकर किवदंती है कि यहां गांव में बारात आई थी और बारात के सभी लोग इस गुप्त सुरंग को देखने के लिए चले गए, लेकिन वह वापस कभी नहीं लौटे. हालांकि, किवदंती का सच क्या है यह तो कहा नहीं जा सकता लेकिन क्षेत्र में यह चर्चा हमेशा रहती है.
चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, रूस, कनाडा, इंग्लैंड, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्ज़रलैंड, केन्या, न्यूजीलैंड सहित कई देशों से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं. आभानेरी गांव दिनभर सैलानियों की चहल-पहल से गुलजार नजर आता है. जिससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है. बढ़ता पर्यटन इस धरोहर को वैश्विक मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित कर रहा है. पर्यटन विभाग आगामी दिनों में चांद बावड़ी में नाइट टूयूरिज शुरू करने की योजना बना रहा है . साथ ही दिल्ली और जयपुर से पर्यटकों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू होने की संभावना है .
राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan News और पाएं Dausa News हर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!