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राजस्थान में 50 हजार अवैध आरओ प्लांट मामले को लेकर सदन में हंगामा

आरओ प्लांट की अनुमति को लेकर पूछे गए पूरक प्रश्नों के जवाब में विश्नोई ने कहा कि किसी भी औद्योगिक इकाई को भूमि दोहन की अनुमति केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से लेनी आवश्यक है. 

राजस्थान में 50 हजार अवैध आरओ प्लांट मामले को लेकर सदन में हंगामा
चितौडगढ़ के लोग इसकी शिकायत लेकर एनजीटी में गए थे.

जयपुर: विधानसभा में शुक्रवार को अवैध आरओ प्लांट का मामला उठा. भाजपा विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने प्रदेश के गली मौहल्ले में आरओ प्लांट चल रहे हैं. सरकार जल संरक्षण का मैसेज दे रही है, जबकि प्रदेश में धड़ल्ले से चल रहे 50 हजार अवैध आरओ प्लांटों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही. 

अवैध आरओ प्लांट्स पर कार्रवाई के लिए कलक्टर अधिकृत
चंद्रभान सिंह आक्या की ओर से पूछे गए सवालों पर पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई ने जवाब देते हुए कहा कि अवैध इकाईयों की जानकारी मिलने पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से कार्रवाई की जाती है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भू-दोहन की अवैध इकाईयों पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार ने 14 जुलाई 2011 को आदेश निकालकर कलक्टर को अधिकृत कर रखा है.

आरओ प्लांट के लिए अनुमति कलक्टर नहीं दे सकता
आरओ प्लांट की अनुमति को लेकर पूछे गए पूरक प्रश्नों के जवाब में विश्नोई ने कहा कि किसी भी औद्योगिक इकाई को भूमि दोहन की अनुमति केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से लेनी आवश्यक है. इसके लिए पर्यावरण और कलक्टर अनुमति नहीं दे सकता. अगर कहीं कलक्टरों से अनुमति ली गई है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी. 

आरओ प्लांट्स से निकलने वाले पानी की जांच कराएगी सरकार
चित्तौडगढ़ के आरओ प्लांट बंद करने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि चितौडगढ़ के लोग इसकी शिकायत लेकर एनजीटी में गए थे. शिकायत पर 23 अप्रैल 2019 को फैसला आया, जिसकी अनुपालना में इन आरओ प्लांट्स को बंद किया जाएगा. इसके साथ ही विश्नोई ने कहा कि आरओ प्लांट्स से निकलने वाले पानी की जांच करवाई जाएगी, कि क्या आरओ प्लांट्स से निकलने वाले पानी को खेती के काम में लिया जा सकता है. 

(इनपुट-शशिमोहन, अंकित के साथ भरत राज)